शुक्रवार, सितंबर 8

नन्हें मुन्नों ने तूलिका से दिया स्वच्छता का संदेश


सहारनपुर - 8 सितंबर -  न्यू आवास स्थित चिराग स्कूल के कक्षा 2 से 5 के 50 से भी अधिक छात्र-छात्राओं ने आज सुबह स्वच्छ भारत विषय पर पेंसिल व ब्रश के माध्यम से अपनी कल्पना को पंख दिये।  रोटरी क्लब के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कक्षा 5 के दिग्विजय सिंह और कक्षा 2 की ऋद्धि ठोस कचरा प्रबन्धन का संदेश दे कर विजयी घोषित किये गये।

शीतल शर्मा व पल्लवी अग्रवाल को दिये गये प्रमाणपत्र
शीतल शर्मा व पल्लवी अग्रवाल अपने प्रमाणपत्रों के साथ
रोटरी क्लब से राजेश कपूर, सुभाष सप्रा, सन्दीप गर्ग, शोभित माथुर व राजेश क्वात्रा ने चिराग़ स्कूल में आयोजित इस चित्रकला प्रतियोगिता की समस्त व्यवस्था संभाली जिसमें चिराग़ स्कूल की शील ऐरन, विभोर ऐरन, ट्विंकल अरोड़ा, कामिनी चोपड़ा, शीतल शर्मा, प्रियंका और आयुषी ने बढ़ चढ़ कर सहयोग किया।

इस अवसर पर रोटे. सुभाष सपरा व रोटे. राजेश कपूर ने कहा कि बच्चों को बहुत छोटी सी आयु में ही सफाई, स्वच्छता और सुन्दरता के सही संस्कार मिलें, यही उद्देश्य लेकर रोटरी क्लब ने ये आयोजन किया है।  बड़ी आयु के व्यक्तियों से अपनी गलत आदतों को बदलने की उम्मीद रखना अक्सर निराश ही करता है।  अच्छा यही रहता है कि हम बाल्यकाल से ही सही शिक्षा और संस्कार अपने बच्चों को दें।   स्वच्छता अच्छे स्वास्थ्य का मूल मंत्र है।   उन्होंने बच्चों को आशीष दिया और उनके द्वारा बनाये गये चित्रों की भूरि भूरि प्रशंसा की।   रोटे. राजेश कपूर ने चिराग स्कूल की प्रिंसिपल शील ऐरन का आभार व्यक्त किया कि उन्होंने व उनकी अध्यापिकाओं ने रोटरी क्लब के इस आयोजन को इतना आकर्षक ढंग से संचालित किया।



इस अवसर पर चिराग स्कूल की प्रिंसिपल शील एरन ने सभी रोटेरियन बन्धुओं का हार्दिक स्वागत किया व आभार व्यक्त किया कि उन्होंने चिराग स्कूल में आकर बच्चों को प्रोत्साहित किया व इस चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया। उन्होंने विजेता बच्चों को बधाई दी !   इस अवसर पर शीतल शर्मा और पल्लवी अग्रवाल को सम्मानित किया गया।      

रविवार, सितंबर 3

सहारनपुर में साहित्य सृजन

सहारनपुर साहित्य-सृजन के क्षेत्र में बहुत समृद्ध है।  देश के साहित्याकाश में जाज्वल्यमान नक्षत्र के रूप में पहचाने जाने वाले अनेकानेक लेखक, पत्रकार, कवि,  उपन्यासकार, संस्मरण लेखक  सहारनपुर की धरती ने ही देश को दिये हैं।  संभवतः सहारनपुर की आबोहवा में ही कुछ वैशिष्ट्य है कि अन्य नगरों, महानगरों में जन्म लेने वाले व्यक्ति भी यहाँ आकर साहित्य-सृजन में जुट जाते हैं। यह भी संभव है कि सहारनपुर  में साहित्य प्रेमियों की विशाल संख्या और उससे मिलने वाला अपार प्रोत्साहन लोगों को  लेखन-चिंतन-काव्य सृजन हेतु अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।  कारण जो भी हो,  सहारनपुर में न केवल पाठ्य-पुस्तकों के लेखक व प्रकाशक बहुतायत में हैं बल्कि लोकप्रिय साहित्य व तकनीकी विषयों पर लिखने वाले रचनाकारों की यहाँ कोई कमी दिखाई नहीं देती।  यही नहीं,  सहारनपुर की धरती पर नाटकों, धारावाहिकों व फिल्मों का भी सृजन हुआ है भले ही उनकी संख्या बहुत कम है।हमारी जानकारी में जो भी साहित्यिक कृतियां आती जा रही हैं हम उनको यहाँ पर सूचीबद्ध करते चले जा रहे हैं।  यदि आपकी जानकारी में कुछ ऐसी पुस्तकें हैं जिनका हम यहाँ जिक्र नहीं कर पाये हैं तो कृपया  हमें उनके बारे में अवश्य बतायें।
प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2009         भाषा : हिन्दी
बचपन एक समन्दर
(666 प्रतिनिधि बाल कवितायें)
रचनाकार/संपादक : कृष्ण ’शलभ’
प्रकाशक :  नीरजा स्मृति बाल साहित्य न्यास
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2009         भाषा : हिन्दी
टुकड़ा-टुकड़ा दर्द
(उपन्यास)
रचनाकार/संपादक : आर. पी. शुक्ल
प्रकाशक :  सृजन प्रिंट्स, सहारनपुर
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2009         भाषा : हिन्दी
शुक्रिया सहारनपुर
(संस्मरण संग्रह)
रचनाकार/संपादक : आर. पी. शुक्ल
प्रकाशक :  सृजन प्रिंट्स, सहारनपुर
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2009         भाषा : हिन्दी
पाती मेरे जीवन की
(गीत-संग्रह)
रचनाकार/संपादक : हरिराम ’पथिक’
प्रकाशक :  अविचल प्रकाशन
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2008         भाषा : हिन्दी
कुछ गुलाब कीकुछ कपास की
(श्री आर.पी. शुक्ल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय)
रचनाकार/संपादक : डा. वीरेन्द्र आज़म
प्रकाशक :  सृजन प्रिंट्स, सहारनपुर
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2008         भाषा : हिन्दी
विभावरी काव्य कलश
(विभावरी के कवि सदस्यों की काव्य रचनाओं का संकलन)
रचनाकार/संपादक : कश्मीर सिंह, योगेश छिब्बर, डा.विजेन्द्रपाल शर्मा, हरिराम पथिक
प्रकाशक :  विभावरी प्रकाशन
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2008         भाषा : हिन्दी
वेदवाणी यजुर्वेद
(वेद का भाष्य)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  वैदिक प्रज्ञा प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2008         भाषा : हिन्दी
वेदवाणी अथर्ववेद
(वेद का भाष्य)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  वैदिक प्रज्ञा प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2008         भाषा : हिन्दी
वेदवाणी सामवेद
(वेद का भाष्य)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  वैदिक प्रज्ञा प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2008         भाषा : हिन्दी
वेदवाणी ऋग्वेद
(वेद का भाष्य)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  वैदिक प्रज्ञा प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2007         भाषा : हिन्दी
डाभगवानदास
(जीवन-चरित)
रचनाकार/संपादक : नीलांजना किशोर
प्रकाशक :  नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2006         भाषा : हिन्दी
तुम अपनी प्यास जितने हो
(काव्य संग्रह)
रचनाकार/संपादक : योगेश छिब्बर ’आनन्द’
प्रकाशक :  सम्यक प्रकाशन
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2006         भाषा : English
Islam Means Peace
(Islamic Religious work)
रचनाकार/संपादक :
प्रकाशक :  Mission Publications
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2006         भाषा : हिन्दी
पीड़ा की निधियां
(मुक्तक संग्रह)
रचनाकार/संपादक : हरिराम ’पथिक’
प्रकाशक :  अविचल प्रकाशन
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2004         भाषा : English
The Killer Sex
(Medico-Religious work)
रचनाकार/संपादक : Dr. Javed Jamil
प्रकाशक :  Mission Publications
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2003         भाषा : हिन्दी
दिल से दिल तक
(काव्य संग्रह)
रचनाकार : शशि  'बलराज’
प्रकाशक :  निर्माण प्रकाशन
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2002         भाषा : English
The Essence of the Divine Verses
(Islamic Religious work)
रचनाकार/संपादक : Dr. Javed Jamil
प्रकाशक :  Mission Publications
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 1998         भाषा : English
Islamic Model of AIDS Control
(Medico-Religious work)
रचनाकार/संपादक : Dr. Javed Jamil
प्रकाशक :  Mission Publications

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 1996         भाषा : English
Islam & Family Planning
(Medico-Religious work)
रचनाकार/संपादक : Dr. Javed Jamil
प्रकाशक :  Mission Publications

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 1986         भाषा :
सहारनपुर संदर्भ
(ऐतिहासिक शोधग्रंथ)
रचनाकार/संपादक : डा.  के.के. शर्मा
प्रकाशक :  सन्दर्भ प्रकाशन, सहारनपुर
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 1963         भाषा : हिन्दी
क्षण बोले कण मुस्कुराये
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक :  भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 1954         भाषा : हिन्दी
जिन्दगी मुस्कुरायी
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक :  भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
चिड़िया बम नहीं बनायेगी
(कविता संग्रह)
रचनाकार/संपादक : योगेश छिब्बर ’आनन्द’
प्रकाशक :  सम्यक प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
सांसों के वृन्दावन में
(प्रेम-आध्यात्म के आख्यानक)
रचनाकार/संपादक : योगेश छिब्बर ’आनन्द’
प्रकाशक :  सम्यक प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
हाथों में ताजमहल
(क्षणिकायें)
रचनाकार/संपादक : योगेश छिब्बर ’आनन्द’
प्रकाशक :  सम्यक प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
नैना गिरवी रख लिये
(दोहा-संग्रह)
रचनाकार/संपादक : योगेश छिब्बर ’आनन्द’
प्रकाशक :  सम्यक प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : English
Rediscovering the Universe
(Scientific-Religious work)
रचनाकार/संपादक : Dr. Javed Jamil
प्रकाशक :  Mission Publications

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा :  हिन्दी  आधुनिक भारतीय इतिहास की प्रमुख भ्रांतियां
(ऐतिहासिक तथ्यों का विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. सतीश चन्द मित्तल
प्रकाशक :  इतिहास संकलन समिति (भारतीय) , हैदराबाद
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
बाजे पायलिया के घुंघरू
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक :  भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
माटी हो गई सोना
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक :  भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
आकाश के तारे धरती के फूल
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक :  भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
महके आंगन चहके द्वार
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक :  भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
दीप जले शंख बजे
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक :  भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
जिन्दगी लहलहायी
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक :  भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
कारवां आगे बढ़े
(ललित निबन्ध)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक : भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
तपती पगडंडियों पर पदयात्रा
(संस्मरण)
रचनाकार/संपादक : कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर
प्रकाशक : भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 1996         भाषा : हिन्दी  सहारनपुर संदर्भ महान विभूतियां
(जीवन-चरित)
रचनाकार/संपादक : डा. के.के. शर्मा व डा. सिप्रा बैनर्जी
प्रकाशक :  सन्दर्भ प्रकाशन
 

प्रथम प्रकाशन वर्ष : 2008         भाषा : हिन्दी
वेदवाणी एक परिचय
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  वैदिक प्रज्ञा प्रकाशन

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
सहारनपुर जनपद में आपातकालीन संघर्ष
(संस्मरण)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  लोक प्रकाशन केन्द्र, सहारनपुर

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
दुर्खेम एक अध्ययन
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  सरस्वती सदन, दिल्ली

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
भारत का समाजशास्त्र
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  ग्रन्थम, कानपुर

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
ग्रामीण समाजशास्त्र
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  विमल प्रकाशन, आगरा

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
समकालीन भारतीय समाज और संस्कृति
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  विमल प्रकाशन, आगरा

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
ज्ञान का समाजशास्त्र
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  रस्तोगी पब्लिकेशन, मेरठ

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
सामाजिक व्यवस्था
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  सरन प्रकाशन मंदिर, मेरठ

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
अपराधशास्त्र
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  ग्रन्थम, कानपुर

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
राजनैतिक समाजशास्त्र
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  ग्रन्थम, कानपुर

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
सामाजिक अनुसंधान की विधियाँ
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  ग्रन्थम, कानपुर

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
समकालीन भारतीय समाज की गतिशीलता
(समाजशास्त्रीय विवेचन)
रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  ग्रन्थम, कानपुर

प्रथम प्रकाशन वर्ष :       भाषा : हिन्दी
गीतयात्रा
(गीत-संग्रह)रचनाकार/संपादक : डा. ओमप्रकाश वर्मा
प्रकाशक :  शील प्रकाशन, जमशेदपुर

गुरुवार, अगस्त 31

आदर्श नागरिक बन रहे हैं शांति विद्यापीठ के छात्र-छात्राएं


सहारनपुर - 31 अगस्त -  युवावर्ग को समाज के असहाय वर्ग के लोगों के प्रति ममत्व, सेवा और सहकार के संस्कार देने के उद्देश्य से शांति विद्यापीठ के निदेशक विशाल श्रीवास्तव ने एक मुहिम चलाई हुई है जिसके अन्तर्गत उन्होंने अपने ऐसे  विद्यार्थियों का समूह बनाया है जिनकी इस बारे में रुचि है।   ये विद्यार्थी अपने – अपने घरों से सप्ताह में एक दिन भोजन बना कर संस्थान में लाकर एकत्र करते हैं। वहां पर एकत्रित भोजन के पैकेट बनाए जाते हैं और फिर ये छात्र निकल पड़ते हैं अपने निदेशक के साथ शाम को सड़कों पर, रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर, कचहरी पुल पर ऐसे लोगों की तलाश में जिनको दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो सकी है। उनको भोजन के पैकेट सौंप कर इन युवाओं को जो संतोष और तृप्ति का अहसास होता है, वह अतुल्य है और यही कारण है कि इस समूह में और भी छात्र – छात्राएं जुड़ने की इच्छा से अपना नाम लिखा रहे हैं।


आई.टी.सी. - सर्किट हाउस रोड पर श्यामनगर (न्यू शारदा नगर) स्थित शांति विद्यापीठ के छात्र - छात्राओं में  अभी तक अनुराधा, मीनाक्षी, दीपाली, लवली, सिमरन, वन्दना, शिवानी राय, नन्दिनी, रितिका, मयंक शर्मा, मयंक, अनमोल, पुरुषार्थ, अभिषेक और आर्यन इस समूह में शामिल होचुके हैं और संस्थान के निदेशक विशाल श्रीवास्तव के निर्देशन में साप्ताहिक सेवा गतिविधियों में जुटे हुए हैं।

विद्यार्थियों ने संस्थान की सड़क की सफाई भी की 

शांति विद्यापीठ की सेवा गतिविधियों में सिर्फ भोजन बांटना ही शामिल नहीं है बल्कि वह हर ऐसा मौका तलाशते हैं जिसमें कुछ अच्छा करने का अवसर मिले।   छात्र-छात्राओं द्वारा श्रमदान करते हुए अपने संस्थान के बाहर वाली सड़क को साफ सुथरा करके चमका देना ऐसा ही एक और उदाहरण है। जिस सड़क को न्यू शारदा नगर निवासी ’कूड़े वाली सड़क’ के रूप में पहचानने लगे थे, अब उस सड़क पर कूड़ा ढूंढे से भी नहीं मिलता है।

जब द सहारनपुर डॉट कॉम के ’घूमता आइना’ ने विशाल श्रीवास्तव से पूछा कि उन्होंने  नगर निगम को सफाई करने के लिये कहने के बजाय खुद सफाई करने का विकल्प क्यों चुना तो उन्होंने बताया कि वह नगर निगम के सफाई कर्मचारियों, सैनेटरी इंस्पेक्टर को तो बीसियों बार अनुरोध कर चुके थे कि वह सड़क को साफ करा दें ताकि संस्थान में आने वाले सैंकड़ों छात्र-छात्राएं और गली के अन्य लोग बीमारियों से बचे रहें पर किसी ने भी उनकी फरियाद नहीं सुनी।

संयोग से उन्हीं दिनों द सहारनपुर डॉट कॉम की ओर से शांति विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं व स्टाफ के लिये ठोस कचरा प्रबन्धन गोष्ठी का आयोजन किया गया।

संस्थान के निदेशक विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि द सहारनपुर डॉट कॉम द्वारा आयोजित की गयी इस कार्यशाला का उनके स्टाफ और छात्र-छात्राओं पर इतना प्रभाव पड़ा कि वह सड़क पर पड़े हुए कूड़े के ढेर को खुद ही साफ करने का संकल्प लेकर जुट गये।   उन्होंने कहा कि उन लोगों को सफाई और सुन्दरता के लिये प्रेरित करने का काम तो द सहारनपुर डॉट कॉम ने ही किया है।

आप भी भेजिए हमें ऐसे समाचार 

हम आपसे अनुरोध करते हैं कि यदि आपके पास भी ऐसे कुछ अच्छे क्रियाकलापों की जानकारी हो जिनसे समाज में अन्य लोगों को भी कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिल सकती है तो कृपया उस गतिविधि की सचित्र रिपोर्ट हमें प्रेषित करें। हम उस समाचार को अवश्य द सहारनपुर डॉट कॉम पर स्थान देंगे।  यदि आप नियमित रूप से अपने क्षेत्र के ऐसे समाचार भेजना चाहें तो हमें thesaharanpur@gmail.com पर अपना बायोडाटा प्रेषित करें ताकि हम प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में आपको शामिल कर सकें।  

बुधवार, अगस्त 30

सहारनपुर को जानो - 2 प्रतियोगिता के परिणाम

सहारनपुर को जानो प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है,  यह निश्चय ही हम सब के लिये हर्ष का विषय है।  इस बार सहारनपुर को जानो-02  प्रतियोगिता में 100 से भी अधिक प्रतिभागियों ने उत्साह सहित भाग लिया है।  जिसके परिणाम इस प्रकार रहे हैं -

मंगलवार, अगस्त 29

11 सितंबर से पांवधोई की पुनः सफाई का संकल्प



सहारनपुर के जिलाधिकारी प्रमोद कुमार पाण्डेय पांवधोई बचाव समिति  से विचार विमर्श करते हुए 

सहारनपुर : 28 अगस्त 2017 – सहारनपुर कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी पी.के. पाण्डेय द्वारा आहूत पांवधोई बचाव समिति की बैठक में कई वर्ष से तिरस्कृत चल रही पांवधोई नदी के पुनरुद्धार को लेकर आज पुनः मंथन हुआ।

आज की बैठक में पांवधोई बचाव समिति के जिलाधिकारी सहित सारे पदेन सदस्य नये थे जिनका कुछ वर्ष पूर्व चलाये गये पांवधोई बचाव आन्दोलन से प्रत्यक्ष या परोक्ष कोई संबंध नहीं रहा था। ऐसे में सबसे पहले जिलाधिकारी ने सभी स्थाई सदस्यों से पांवधोई बचाव समिति की पूर्व में चलाई गयी गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्र की। उपसचिव डा. शर्मा ने जहां पांवधोई नदी के उद्‌गम और पूर्व में चले अभियान व उपलब्धियों से जिलाधिकारी को अवगत कराया, वहीं सुशान्त सिंहल ने कहा कि पांवधोई नदी सिर्फ जिलाधिकारी की सक्रियता पर निर्भर रहेगी तो नदी की स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी। जरूरी ये है कि हम नदी के दोनों तटों पर निगरानी समितियों का पुनः गठन करें और उनको ही अपने अपने क्षेत्र में सफाई बनाये रखने की जिम्मेदारी दें। पांवधोई बचाओ समिति का कार्य सिर्फ इतना होना चाहिये कि वह निगरानी समितियों की सहायता करे और समेकित योजना बना कर नदी में जल का प्रवाह सुनिश्चित करे, नदी का सौन्दर्यकरण करे। पांवधोई बचाव समिति के पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी ने पांवधोई नदी के पुनरुद्धार के मार्ग में आने वाली समस्याओं को समझने का प्रयास किया ताकि तदनुरूप कार्ययोजना बना कर उस पर त्वरित गति से कार्य आरंभ किया जा सके।



पांवधोई नदी को लेकर जो चुनौतियां सहारनपुर वासियों के सम्मुख हैं, उनका ज़िक्र करना हो तो

1. ग्राम सकलापुरी यानि पांवधोई के उद्‍गम स्थल पर जल का प्रवाह बढ़ाने की आवश्यकता,

2. नदी के दोनों किनारों पर अतिक्रमण व कूड़ाघर हटाना,

3. नदी में गिरने वाले ठोस कचरे को गिरने से रोकना,

4. नदी के दोनों तटों पर सीवर लाइनों को पुनः चालू कराना,

5. नदी में गिरने वाले 98 सरकारी नालों का प्रवाह सीवर लाइन की ओर करना,

6. नदी के तटों पर लगाई गयी जाली की मरम्मत कराना,

7. निगरानी समितियों को पुनः सक्रिय करना,

8. जनजागृति अभियान चलाना,

9. नदी में जमा गन्दगी को बाहर निकालना व

10. नदी का सौन्दर्यकरण

आदि शामिल हैं। आज की बैठक में तय किया गया कि क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ते हुए इन सभी समस्याओं का निराकरण किया जायेगा और जो भी समस्याएं आयेंगी, जिलाधिकारी शासन के स्तर पर उनका समाधान कराने का भरसक प्रयास करेंगे। अभियान की शुरुआत निगरानी समितियों की बैठकों से की जायेगी जिसके बाद सभी निगरानी समितियों की एक रैली भी निकाली जायेगी।

इस बैठक में बोलते हुए जिलाधिकारी प्रमोद कुमार पांडेय ने नगरवासियों, दुकानदारों, फल व सब्ज़ी विक्रेताओं से आग्रह किया है कि वह पांवधोई व ढमोला नदी में न तो कूड़ा डालें और न ही अतिक्रमण करें। अतिक्रमण के लिये उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को आदेश दिया कि वह तुरन्त नोटिस देकर अतिक्रमण हटवाएं और आदेश का पालन न करने वालों पर एफ.आई. आर. दर्ज़ कराई जाये। उन्होंने सिंचाई विभाग को ये आदेश भी दिया कि नदी के तटों को पक्का करने का जो प्रस्ताव 2014 में शासन को भेजा गया था, उसे पुनः नगर विकास विभाग को भेज कर स्वीकृत कराया जाये। गंदा पानी और कूड़ा डालने वालों के चालान काटे जायें और जुर्माना वसूल किया जाये।

पांवधोई का सफाई अभियान 11 सितंबर से चलाया जायेगा। इसमें सफाई के अलावा क्षेत्रवासियों के साथ मिल कर रैली भी निकाली जायेगी।

आज की बैठक में जिलाधिकारी पी.के. पांडेय, एडीएम ई एस के दुबे, नगर आयुक्त गौरव वर्मा, नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार, सहारनपुर विकास प्राधिकरण के सचिव एस.पी. शर्मा व ए.के. माथू, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता मोहित कुमार, प्रदूषण नियंत्रण विभाग के जे.बी.सिंह, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ए पी सिंह, अल्पना तलवार, ए.सी. पपनेजा, वीरेन्द्र कुमार शर्मा ’पम्मी’, कुलभूषण कुमार जैन, डा. पी.के. शर्मा, मेजर के.एस. सिंह आई.टी.सी., शीतल टंडन, सुशान्त सिंहल, वीरेन्द्र आज़म, आमिर खान और मौलवी फरीद ने सक्रिय भाग लिया। राजस्थान पत्रिका के शिव मणि त्यागी ने व द सहारनपुर डॉट कॉम के सुशान्त सिंहल ने पांवधोई बचाव आन्दोलन को जन-जन तक पहुंचाने में सोशल मीडिया के अपरिमित महत्व को देखते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उल्लेखनीय है कि द सहारनपुर डॉट कॉम सहित नगर के सभी समाचार पत्रों ने पहले भी पांवधोई बचाओ आन्दोलन की इतनी धूम मचाई थी कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 24 जिलाधिकारियों को आदेश दिये थे कि वह भी सहारनपुर की तर्ज़ पर अपने अपने जनपद की नदियों को साफ करायें।

पांवधोई बचाओ आन्दोलन का इतिहास

संभवतः आपको याद हो कि 12 मई 2010 को तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक कुमार की पहल पर 22 सदस्यीय पांवधोई बचाव समिति का गठन किया गया था जिसमें जिलाधिकारी, एडीएम (ई), नगर आयुक्त, सहारनपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम के अधिशासी अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, सिंचाई विभाग, यमुना एक्शन प्लान, लोक निर्माण विभाग, जलकल विभाग आदि विभिन्न सरकारी विभागों से 11 पदेन सदस्य थे और 11 स्थाई सदस्य जनता के मध्य से नामित किये गये थे जिनमें डा. एस.के. उपाध्याय, प्रमोद कुमार शर्मा, कुलभूषण जैन, प्रो. पम्मी शर्मा, सुशान्त सिंहल, डा. वीरेन्द्र आज़म, अल्पना शर्मा तलवार, ए.सी. पपनेजा, आमिर खान, मौलवी फरीद व शीतल टंडन थे।

जिलाधिकारी आलोक कुमार के सहारनपुर से स्थानान्तरण के बाद पांवधोई बचाव समिति नगर आयुक्त डा. नीरज शुक्ला के नेतृत्व में कुछ दिन तक कार्य करती रही पर बाद में आने वाले विभिन्न जिलाधिकारियों ने पांवधोई के जीर्णोद्धार में कोई रुचि नहीं ली और धीरे – धीरे पांवधोई की स्थिति लगभग पहले जैसी ही हो गयी। पांवधोई बचाव समिति के सदस्य भी सिर्फ तब ही सक्रिय हुए जब जिलाधिकारी अथवा नगर आयुक्त ने सक्रियता दिखाई।  

शनिवार, अगस्त 26

सहारनपुर को जानो - पहचानो - 02

सहारनपुर को जानो - 01 प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये आप सब ने जो उत्साह दिखाया, उसे देखते हुए हम आज प्रतियोगिता का दूसरा संस्करण लेकर उपस्थित हैं।   इस प्रतियोगिता में आप मंगलवार, 29 अगस्त, 2017 को रात्रि 8.00 बजे तक भाग ले सकते हैं।

जैसा कि हमने पहले भी बताया था, हम एक मास में चार ऐसे प्रतियोगिताओं का आयोजन करेंगे और उनके विजेताओं को एक साथ एक कार्यक्रम का आयोजन करके पुरस्कार दिये जायेंगे।   जैसा कि आप जानते ही हैं, हमारी पहली प्रतियोगिता के दो विजेता हैं - श्री हर्षवर्द्धन  और श्री एम. रियाज़ हाशमी !

देखें, इस बार कौन विजेता के रूप में सामने आते हैं -  ये रही सहारनपुर को जानो प्रतियोगिता - 02.

बुधवार, अगस्त 23

सहारनपुर का पहला मेयर कौन?

मित्रों, सुना है कि सहारनपुर नगर निगम को अन्ततः उसके अपने जन-प्रतिनिधि मिलने जा रहे हैं।  चुनाव की सुगबुगाहट शुरु हो चुकी है।  सहारनपुर नगर निगम के सृजन से लेकर आज तक सहारनपुर वासी इंतज़ार ही कर रहे हैं कि उनके चुने हुए जन-प्रतिनिधियों द्वारा नगर निगम का संचालन किया जाये।

आपकी दृष्टि में सहारनपुर नगर निगम के प्रथम मेयर के रूप में कौन - कौन उम्मीदवार आदर्श हो सकते हैं?  तीन अलग - अलग परिस्थितियां  हो सकती हैं अतः आपको थोड़ी माथा-पच्ची करनी पड़ेगी !   वे तीन परिस्थितियां निम्न प्रकार हैं -

  1. मेयर पद के लिये कोई भी आरक्षण न हो !
  2. मेयर पद को आरक्षित सीट घोषित कर दिया जाये (एस.सी. / एस. टी. वर्ग हेतु)
  3. मेयर पद को महिला सुरक्षित सीट घोषित कर दिया जाये।
अतः आप नीचे दिये गये फार्म को भर कर हमें उक्त तीनों परिस्थितियों के लिये तीन - तीन, इस प्रकार 9 नाम देने का प्रयास करें।   कई वर्ष पहले भी ऐसा एक सर्वे हमने किया था जिसमें कुछ नाम उभर कर आये थे - जैसे आर.पी. शुक्ला (भूतपूर्व कमिश्नर), संजय गर्ग, इमरान मसूद, संजय कपिल, कुदसिया अंजुम, महेन्द्र तनेजा, प्रवेश धवन आदि !   

यदि आपके द्वारा सुझाया गया उम्मीदवार इस सर्वे में सबसे अधिक लोकप्रिय उम्मीदवार के रूप में उभर कर सामने आता है तो आप का नाम निश्चय ही पुरस्कार हेतु बनाई जा रही लिस्ट में शामिल किया जायेगा।  सबसे पहले हमें फार्म भर कर भेजने वाले तीन ऐसे प्रतिभागियों को पुरस्कार देने की योजना है।

ये रहा फार्म -

    

मंगलवार, अगस्त 22

राजेन्द्र राजन के ग़ज़ल संग्रह ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ का लोकार्पण

हिन्दी वालों ने ग़ज़ल का नुकसान नही किया वरन्‌ उसका सौंदर्य बढ़ाया है: अश्वघोष



सहारनपुर। देश के प्रख्यात गीतकार राजेन्द्र राजन के ग़ज़ल संग्रह ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ का लोकार्पण एक भव्य समारोह में जीपीओ रोड स्थित एक सभागार में किया गया। अध्यक्षता देहरादून से आये प्रख्यात साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने की।

सोमवार, अगस्त 21

नगर आयुक्त ने आधी रात तक जनता की समस्याएं सुनीं!

सहारनपुर - 19 अगस्त -  अगर सहारनपुर के नगर आयुक्त गौरव वर्मा और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. गीता राम रमन,  द सहारनपुर डॉट कॉम की पहल पर आधी रात तक व्यापारियों के साथ ठोस कचरे के प्रबन्धन को लेकर मंथन करते दिखाई दें, तो ये सहारनपुर के लिये अच्छे दिनों की आहट का ही संकेत हो सकता है।

रविवार, अगस्त 20

डी ए वी पब्लिक स्कूल का पूरा सहयोग मिलेगा आपके जन-जागरण अभियान को - मीनू भट्टाचार्य



सहारनपुर – 19 अगस्त – डी ए वी पब्लिक स्कूल सोनिया विहार के छात्र – छात्राओं ने नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी गीता राम को आज सड़कों पर फेंके जा रहे कूड़े के बारे में प्रश्न पूछ – पूछ कर निरुत्तर कर दिया। दरअसल, विशिष्ट अतिथि के रूप में छात्र – छात्राओं से संवाद कर रहे नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि गीला कूड़ा और सूखा कूड़ा अलग – अलग डस्टबिन में रख कर सफाई कर्मचारी को देना चाहिये। इस पर कुछ छात्राओं ने पूछा कि सर, हम तो कूड़ा अलग – अलग करके देते हैं पर नगर निगम के सफाई कर्मचारी उसे पुनः एक ही जगह मिला कर सड़क पर फेंक देते हैं तो ऐसे में हमें क्या करना चाहिये? नगर स्वास्थ्य अधिकारी गीता राम ने कहा कि वह अभी दो महीने पहले ही सहारनपुर आये हैं और कचरे की वर्तमान अव्यवस्था को सुधारने में लगे हुए हैं।शहर में चार संस्थाओं को कूड़ा संग्रह का काम दिया गया है जिनमें दो संस्थाएं कूड़े से खाद भी बना रही हैं।  बाकी दो संस्थाएं भी शीघ्र ही खाद बनाने लगेंगी। 

जो विशेष पसन्द किये गये !