गुरुवार, अगस्त 31

आदर्श नागरिक बन रहे हैं शांति विद्यापीठ के छात्र-छात्राएं


सहारनपुर - 31 अगस्त -  युवावर्ग को समाज के असहाय वर्ग के लोगों के प्रति ममत्व, सेवा और सहकार के संस्कार देने के उद्देश्य से शांति विद्यापीठ के निदेशक विशाल श्रीवास्तव ने एक मुहिम चलाई हुई है जिसके अन्तर्गत उन्होंने अपने ऐसे  विद्यार्थियों का समूह बनाया है जिनकी इस बारे में रुचि है।

बुधवार, अगस्त 30

सहारनपुर को जानो - 2 प्रतियोगिता के परिणाम

सहारनपुर को जानो प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की लोकप्रियता निरंतर बढ़ती जा रही है,  यह निश्चय ही हम सब के लिये हर्ष का विषय है।  इस बार सहारनपुर को जानो-02  प्रतियोगिता में 100 से भी अधिक प्रतिभागियों ने उत्साह सहित भाग लिया है।  जिसके परिणाम इस प्रकार रहे हैं -



इस बार सभी प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले तीन प्रतियोगी रहे !

प्रथम पुरस्कार - anubhav.bajaj555@gmail.com
द्वितीय पुरस्कार - khalidhasan2@gmail.com
विशेष पुरस्कार - riyazhashmi@gmail.com

यहां ये उल्लेखनीय है कि श्री एम. रियाज़ हाशमी पहली प्रतियोगिता में भी सह-विजेता के रूप में उभरे थे।  तीनों विजेताओं को द सहारनपुर डॉट कॉम की ओर से हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं !

मंगलवार, अगस्त 29

11 सितंबर से पांवधोई की पुनः सफाई का संकल्प



सहारनपुर के जिलाधिकारी प्रमोद कुमार पाण्डेय पांवधोई बचाव समिति  से विचार विमर्श करते हुए 

सहारनपुर : 28 अगस्त 2017 – सहारनपुर कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी पी.के. पाण्डेय द्वारा आहूत पांवधोई बचाव समिति की बैठक में कई वर्ष से तिरस्कृत चल रही पांवधोई नदी के पुनरुद्धार को लेकर आज पुनः मंथन हुआ।

शनिवार, अगस्त 26

सहारनपुर को जानो - पहचानो - 02

सहारनपुर को जानो - 01 प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये आप सब ने जो उत्साह दिखाया, उसे देखते हुए हम आज प्रतियोगिता का दूसरा संस्करण लेकर उपस्थित हैं।   इस प्रतियोगिता में आप मंगलवार, 29 अगस्त, 2017 को रात्रि 8.00 बजे तक भाग ले सकते हैं।

जैसा कि हमने पहले भी बताया था, हम एक मास में चार ऐसे प्रतियोगिताओं का आयोजन करेंगे और उनके विजेताओं को एक साथ एक कार्यक्रम का आयोजन करके पुरस्कार दिये जायेंगे।   जैसा कि आप जानते ही हैं, हमारी पहली प्रतियोगिता के दो विजेता हैं - श्री हर्षवर्द्धन  और श्री एम. रियाज़ हाशमी !

देखें, इस बार कौन विजेता के रूप में सामने आते हैं -  ये रही सहारनपुर को जानो प्रतियोगिता - 02.

बुधवार, अगस्त 23

सहारनपुर का पहला मेयर कौन?

मित्रों, सुना है कि सहारनपुर नगर निगम को अन्ततः उसके अपने जन-प्रतिनिधि मिलने जा रहे हैं।  चुनाव की सुगबुगाहट शुरु हो चुकी है।  सहारनपुर नगर निगम के सृजन से लेकर आज तक सहारनपुर वासी इंतज़ार ही कर रहे हैं कि उनके चुने हुए जन-प्रतिनिधियों द्वारा नगर निगम का संचालन किया जाये।

आपकी दृष्टि में सहारनपुर नगर निगम के प्रथम मेयर के रूप में कौन - कौन उम्मीदवार आदर्श हो सकते हैं?  तीन अलग - अलग परिस्थितियां  हो सकती हैं अतः आपको थोड़ी माथा-पच्ची करनी पड़ेगी !   वे तीन परिस्थितियां निम्न प्रकार हैं -

  1. मेयर पद के लिये कोई भी आरक्षण न हो !
  2. मेयर पद को आरक्षित सीट घोषित कर दिया जाये (एस.सी. / एस. टी. वर्ग हेतु)
  3. मेयर पद को महिला सुरक्षित सीट घोषित कर दिया जाये।
अतः आप नीचे दिये गये फार्म को भर कर हमें उक्त तीनों परिस्थितियों के लिये तीन - तीन, इस प्रकार 9 नाम देने का प्रयास करें।   कई वर्ष पहले भी ऐसा एक सर्वे हमने किया था जिसमें कुछ नाम उभर कर आये थे - जैसे आर.पी. शुक्ला (भूतपूर्व कमिश्नर), संजय गर्ग, इमरान मसूद, संजय कपिल, कुदसिया अंजुम, महेन्द्र तनेजा, प्रवेश धवन आदि !   

यदि आपके द्वारा सुझाया गया उम्मीदवार इस सर्वे में सबसे अधिक लोकप्रिय उम्मीदवार के रूप में उभर कर सामने आता है तो आप का नाम निश्चय ही पुरस्कार हेतु बनाई जा रही लिस्ट में शामिल किया जायेगा।  सबसे पहले हमें फार्म भर कर भेजने वाले तीन ऐसे प्रतिभागियों को पुरस्कार देने की योजना है।

ये रहा फार्म -

    

मंगलवार, अगस्त 22

राजेन्द्र राजन के ग़ज़ल संग्रह ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ का लोकार्पण

हिन्दी वालों ने ग़ज़ल का नुकसान नही किया वरन्‌ उसका सौंदर्य बढ़ाया है: अश्वघोष



सहारनपुर। देश के प्रख्यात गीतकार राजेन्द्र राजन के ग़ज़ल संग्रह ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ का लोकार्पण एक भव्य समारोह में जीपीओ रोड स्थित एक सभागार में किया गया। अध्यक्षता देहरादून से आये प्रख्यात साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने की।

सोमवार, अगस्त 21

नगर आयुक्त ने आधी रात तक जनता की समस्याएं सुनीं!

सहारनपुर - 19 अगस्त -  अगर सहारनपुर के नगर आयुक्त गौरव वर्मा और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. गीता राम रमन,  द सहारनपुर डॉट कॉम की पहल पर आधी रात तक व्यापारियों के साथ ठोस कचरे के प्रबन्धन को लेकर मंथन करते दिखाई दें, तो ये सहारनपुर के लिये अच्छे दिनों की आहट का ही संकेत हो सकता है।

रविवार, अगस्त 20

डी ए वी पब्लिक स्कूल का पूरा सहयोग मिलेगा आपके जन-जागरण अभियान को - मीनू भट्टाचार्य



सहारनपुर – 19 अगस्त – डी ए वी पब्लिक स्कूल सोनिया विहार के छात्र – छात्राओं ने नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी गीता राम को आज सड़कों पर फेंके जा रहे कूड़े के बारे में प्रश्न पूछ – पूछ कर निरुत्तर कर दिया। दरअसल, विशिष्ट अतिथि के रूप में छात्र – छात्राओं से संवाद कर रहे नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि गीला कूड़ा और सूखा कूड़ा अलग – अलग डस्टबिन में रख कर सफाई कर्मचारी को देना चाहिये। इस पर कुछ छात्राओं ने पूछा कि सर, हम तो कूड़ा अलग – अलग करके देते हैं पर नगर निगम के सफाई कर्मचारी उसे पुनः एक ही जगह मिला कर सड़क पर फेंक देते हैं तो ऐसे में हमें क्या करना चाहिये? नगर स्वास्थ्य अधिकारी गीता राम ने कहा कि वह अभी दो महीने पहले ही सहारनपुर आये हैं और कचरे की वर्तमान अव्यवस्था को सुधारने में लगे हुए हैं।शहर में चार संस्थाओं को कूड़ा संग्रह का काम दिया गया है जिनमें दो संस्थाएं कूड़े से खाद भी बना रही हैं।  बाकी दो संस्थाएं भी शीघ्र ही खाद बनाने लगेंगी। 

शुक्रवार, अगस्त 18

स्वतंत्रता दिवस पर कवि सम्मेलन और मुशायरा

सहारनपुर। 16 अगस्त !   आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में जिला प्रशासन द्वारा गंगा-जमुनी संस्कृति पर आधारित एक संयुक्त कवि सम्मेलन व मुशायरा यहां जनमंच सभागार में आयोजित किया गया। नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन सांसद राघव लाखनपाल शर्मा, जिलाधिकारी पी के पांडेय, एडीएम एसके दुबे, नगर विधायक संजय गर्ग, पूर्व मंत्री सरफराज खां व सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन राजेश जैन आदि ने दीप प्रज्ज्वलित व रिबन काटकर किया। कार्यक्रम की शुरुआत आसिफ शम्सी द्वारा नात और विनोद भृंग द्वारा सरस्वती वंदना से की गयी। प्रख्यात साहित्यकार कृष्ण शलभ की अध्यक्षता और सुरेश सपन के नायाब संचालन में रात करीब एक बजे तक डीएम पी के पांडेय व एसएसपी बबलू कुमार सहित बड़ी तन्मयता और संजीदगी के साथ बैठे रहे श्रोताओं ने कवि सम्मेलन व मुशायरे की सफलता की खुद ही इबारत लिख दी।



गुरुवार, अगस्त 17

अपने सहारनपुर को जानो पहचानो - 01 प्रतियोगिता के परिणाम

मित्रों, हमने दि. 15 अगस्त को अपने सहारनपुर को जानो - पहचानो - 01 ऑनलाइन क्विज़  आरंभ की थी जिसमें कल 16 अगस्त को सायं 5 बजे तक हमें 51 प्रतिभागियों की प्रविष्टियां प्राप्त हुईं !  स्कूल - कॉलिज में छुट्टी होने के कारण हम  वहां संपर्क नहीं कर सके।    

सभी प्रश्नों के सभी उत्तर सही कोई भी प्रतिभागी नहीं दे पाये !  परन्तु सर्वश्रेष्ठ उत्तर  (केवल १ गलत उत्तर)  देने वाले दो प्रतिभागियों के नाम हम यहां पर दे रहे हैं - 

१- श्री हर्षवर्द्धन सैनी - प्रथम पुरस्कार
२- श्री एम. रियाज़ हाशमी - द्वितीय पुरस्कार 

दोनों विजेताओं को हार्दिक बधाई !   हर्षवर्द्धन सैनी और एम. रियाज़ हाशमी के द्वारा प्रेषित उत्तर बिल्कुल एक जैसे थे परन्तु हर्ष की प्रविष्टि हमें १० मिनट पहले प्राप्त हुई!    

सही उत्तर इस प्रकार हैं - 

हमारा पहला सवाल था - ललता प्रसाद अख्तर कौन थे?    सही उत्तर है - सहारनपुर के एक स्वतंत्रता सैनानी !

बुधवार, अगस्त 16

सहारनपुर - एक आकर्षक पर्यटन स्थल

उत्तर प्रदेश में जब पर्यटन की बात होती है तो सहारनपुर को इस दृष्टि से निर्धन मान कर हमेशा उपेक्षित कर दिया जाता है। प्रदेश की पर्यटन संबंधी पुस्तकों को सहारनपुर का नाम नगण्य है। देश-विदेश के पर्यटक सहारनपुर के निकटवर्ती देहरादून, मसूरी, हरिद्वार और ऋषिकेश घूमने आते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में सहारनपुर घूमे बिना चले जाते हैं। यह सहारनपुर के लिये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

सहारनपुर सदियों से समृद्ध क्षेत्र रहा है। सहारनपुर नगर मुगलकाल में बसा है लेकिन सरसावा, बेहट, देवबन्द, नकुड़ नगर महाभारतकालीन हैं। यहां घने वन होने के कारण पांडवों ने अपना अज्ञातवास इसी क्षेत्र में बिताया था। 

सहारनपुर का दारुल उलूम देवबन्द

 सहारनपुर का दारुल उलूम देवबन्द 
दारुल उलूम देवबन्द का मुख्य भवन

मंगलवार, अगस्त 15

अपने सहारनपुर को पहचानो - 01

आज आपके सामने एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है - अपने सहारनपुर को जानो - पहचानो !  हम आपको सहारनपुर के विभिन्न स्थानों के कुछ चित्र दिखा रहे हैं और कुछ प्रश्न पूछ रहे हैं।  आपको ये फार्म भर कर यहीं हमें प्रेषित करना है।

सारे सही जवाब देने वाले पहले तीन प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया जायेगा।   यहां कमेंट के रूप में जवाब देने से ये प्रतियोगिता अन्य प्रतिभागियों के लिये बेकार हो जायेगी अतः यहां या फेसबुक आदि पर उत्तर देना मना है।  

प्रतियोगिता में उत्तर देने के लिये आपके पास कल यानि 16 अगस्त 2017 के सायं 5 बजे तक का समय है।

SAHARANPUR FUN QUIZ No. 1  

शनिवार, अगस्त 12

समन्वय - साहित्यिक संस्था

समन्वय  ( सहारनपुर की एक अग्रणी साहित्यिक संस्था) 

स्थापना - वर्ष 1982
पंजीयन संख्या - 1365

संपर्क - N-59, पैरामाउंट ट्यूलिप, दिल्ली रोड, सहारनपुर-247001
फोन - कृष्ण शलभ - 09358326621,  विनोद भृंग - 9758350247

राष्ट्रभाषा हिन्दी का प्रचार-प्रसार तथा सृजनात्मक चेतना से प्रबुद्ध नागरिकों के साथ सार्थक संवाद बनाये रखने के निमित्त वर्ष 1982 में ’समन्वय’ संस्था की स्थापना हुई थी।  आत्मवत्‌ सर्वभूतेषु’ की भावना से जुड़े ’समन्वय’ का अर्थ है - जीवन जीने का आनन्द, श्रेष्ठ का सृजन और उसे विभिन्न माध्यमों से रूपायित करने का प्रयास !

विभावरी - साहित्यिक तीर्थ यात्रा

साहित्य के क्षेत्र में 25 अगस्त, 1983 से कार्य कर रही संस्था विभावरी सहारनपुर की एक प्रतिष्ठित संस्था है जिससे अनेक साहित्यानुरागी और साहित्यकार जुड़े हुए हैं और साहित्य - सृजन को गति प्रदान कर रहे हैं।
डा. सीताराम त्यागी, श्री रघुवीर सिंह ’अरविन्द’, स्व. डा. ओम प्रकाश वर्मा, श्री धर्मपाल दत्त, डा.विजेन्द्र पाल शर्मा, श्री राजेन्द्र कर्णवाल, डा. सुखबीर सिंह सैनी, श्री प्रह्लाद आतिश और श्री अनवर ताबां इस संस्था के संस्थापक सदस्य कहे जा सकते हैं।

गुरुवार, अगस्त 10

ग्राम मुंडी खेड़ी में पौध रोपण कराया गया

सहारनपुर - 10 अगस्त -  युवा पर्यावरण संरक्षण समिति, सहारनपुर के तत्वावधान में आज ग्राम मुण्डी खेड़ी, निकट साहब  सिंह आई. टी. आई. रामपुर मनिहारान, जिला सहारनपुर में पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर समिति की अध्यक्ष श्रीमती राकेश ने पर्यावरण व पशु-पक्षियों को बचाने का आह्वान किया।  उन्होंने कहा कि प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है जिसके परिणाम  न केवल इंसान बल्कि पशु पक्षी भी भुगत रहे हैं।  उन्होंने युवा पर्यावरण संरक्षण समिति के सभी सदस्यों से इस चुनौती से पूरे जोश के साथ लड़ने की अपील की  और कहा कि हमें सामान्य जन को भी जागृत और प्रेरित करना होगा कि वह भी पर्यावरण प्रदूषण से जन्म लेने वाली समस्याओं को समझें और उनसे बचें।

अदाकार ग्रुप ADACAR Group

ACTION FOR DRAMATIC ADVANCEMENT, CREATIVE ARTS RESEARCH (ADACAR) 

(स्थापना : वर्ष 1984)
स्व. मसरूर खां सरोहा की स्मृति में अदाकार ग्रुप की स्थापना प्रख्यात रंगकर्मी श्री जावेद खान सरोहा द्वारा की गई थी जो लेखन, अभिनय, निर्देशन, प्रकाश व मंच निर्माण आदि रंगमंच की विभिन्न विधाओं में गहरी रुचि एवं पकड़ रखते हैं। अदाकार ग्रुप के प्रमुख रंगकर्मी शम्स तबरेज़ ( लेखन, अभिनय, निर्देशन), डा. एम. रोशन (अभिनय, निर्देशन), वसीउर्रहमान (निर्देशन, अभिनय), बी. पी. सिंह, रईस अहमद, मजाज उल हक़, प्रदीप पाराशर, असलम अंसारी, पवन शर्मा, विक्रान्त जैन, मुकेश मानकटाला, संजीव मिलवानिया, अशोक वर्मा, अनुपमा भूषण, रोज़ी कालिया, कु. सोनू कौर, बिन्दर कौर, मीनाक्षी डाबर, आभा गौतम, रोमा मोघा, आभा मित्तल, निष्ठा शर्मा, प्रतिष्ठा शर्मा, डा. वी. के. आत्रे, संदीप शर्मा, हरि ओम कालड़ा, कनिका शर्मा, अंजलि भारद्वाज, श्रीमती करुणा प्रकाश, सुहैल अख्तर, शहीम परवेज़, आकाश तोमर, शीशपाल सिंह , मुसव्विर अली खां, प्रतिभा श्रीवास्तव, नवनीत वर्मा, पंकज मल्होत्रा, प्रशान्त ’आज़ाद’, नितिन, पिंकी गुप्ता, पल्लवी वशिष्ठ, शचि अग्रवाल, गुंजन मक्कड़, यामिनी शर्मा, शाहिद इकबाल, शान सिद्दिकी, कुलदीप दीक्षित, शीतल त्यागी, अनुभव भल्ला आदि हैं। अदाकार ग्रुप से अपनी रंगकर्म यात्रा शुरु करने वाले अनेकानेक रंगकर्मी आज फिल्म व टी.वी. के स्थापित कलाकार हैं।

बुधवार, अगस्त 9

ज्ञानकलश स्कूल में आयोजित हुई ठोस कचरा प्रबन्धन सेमिनार

सहारनपुर – 10 अगस्त – द सहारनपुर डॉट कॉम द्वारा ज्ञानकलश इंटरनेशनल स्कूल सहारनपुर में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए सहारनपुर नगर विधायक व पूर्व राज्यमंत्री संजय गर्ग ने ठोस कचरे और पॉलीथिन की विकराल समस्या के बारे में श्रोताओं को चेताते हुए कहा कि ठोस कचरा और पॉलीथिन अब सिर्फ एक शहर की सुन्दरता या सफाई का मामला नहीं रह गये हैं बल्कि ये अब मानव जाति के अस्तित्व का सवाल बन गया है।  श्री गर्ग ने आगे कहा कि कोई भी सरकार या प्रशासनिक अमला इस समस्या से अकेले नहीं निबट सकता, इसमें हम सभी को अपने अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे।  यदि हम इस जिम्मेदारी से निगाहें चुरायेंगे तो अपना ही अस्तित्व खतरे में डालेंगे।“   पूर्व राज्यमंत्री संजय गर्ग ने दिल्ली में स्थान स्थान पर खड़े होगये कूड़े – कचरे के पहाड़ों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये हमारे नीति निर्माताओं की नासमझी के स्मारक हैं।  गाज़ीपुर सड़क के किनारे खाली मैदान को डंपिंग ग्राउंड बना कर कुछ वर्ष पहले वहां कूड़ा डालना आरंभ किया गया था और कूड़े पर कूड़ा पड़ते पड़ते स्थिति यह हो गयी है कि आज ये कूड़ा एक पहाड़ की शक्ल ले चुका है जिस पर कूड़े के ट्रक कूड़ा फेंकने के लिये जाते हैं।  यही स्थिति दिल्ली में सीलमपुर की भी है।

सहारनपुर को स्मार्ट सिटी कैसे बनाया जाये?

जैसा कि शासन व प्रशासन की सही सोच है, किसी भी शहर के लिये स्मार्ट सिटी योजना का प्रारूप उस शहर की विशिष्ट स्थिति व परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बनाया जाना चाहिये।  इस दृष्टि से सहभागिता को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है, जनता से सुझाव मांगे जा रहे हैं, ताकि जो भी योजना बने उसमें शहर के नागरिकों की इच्छाएं और अपेक्षाएं झलकती हों!

मंगलवार, अगस्त 8

सहारनपुर में रेल यातायात

सहारनपुर जंक्शन (SRE Jn.) 

रेल यातायात की दृष्टि से सहारनपुर जंक्शन उत्तरी रेलवे के प्रमुख ब्राड गेज़ जंक्शन में से एक है और सभी मेल, एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेन यहां रुकती हैं।   इतना ही नहीं, सहारनपुर स्टेशन पर ही डीज़ल का बहुत बड़ा डिपो भी है अतः यहां से होकर गुज़रने वाले डीज़ल इंजन को इंधन की आपूर्ति सहारनपुर जंक्शन से होती है। सहारनपुर जंक्शन भारत में रेल यातायात आरंभ होने के समय से ही महत्वपूर्ण स्थान माना जाता रहा है।  मुंबई से पेशावर (अब पाकिस्तान)  रेल मार्ग पर फ्रंटियर मेल मुंबई के कोलाबा स्टेशन से 1 सितंबर 1928 को पहली बार रवाना हुई थी और सहारनपुर जंक्शन से होते हुए ही गयी थी।  इसका अर्थ ये हुआ कि मुम्बई से दिल्ली तक 1393 किमी और दिल्ली से पेशावर 2335 किमी, कुल मिला कर 3728 किमी !  एक समय था जब फ्रंटियर मेल को ब्रिटिश साम्राज्य की सबसे तेज़ और सबसे अधिक लोकप्रिय ट्रेन का दर्ज़ा हासिल था।  भारत विभाजन के बाद से ये ट्रेन सिर्फ अमृतसर तक ही जाती है।

रविवार, अगस्त 6

पूरा मुल्क हाथ धो रहा है ! (हास्य व्यंग्य)

लंबा टीका, उससे प्रतिद्वन्दिता करती लंबी चोटी, सफेद लकदक धोती-कुर्ता और गले में लाल साफा। पंडित त्रिलोकीनाथ सुबह-सवेरे घर से निकलते तो पूरी गली में नहाये धोए से अलग ही दिखाई देते। जो भी मिलता उसे राम-राम करते और आगे बढ़ जाते। रोज का यह सिलसिला ही उनकी मानो नियति थी। लेकिन आज घर से निकले तो परम्परा से हटकर नजर आये। आज उन्होंने नहीं बल्कि लोगों ने उन्हें राम-राम, नमस्ते की। चूंकि पंडितजी का ध्यान आज कहीं और था। सब आश्चर्यचकित ! सबने देखा, पंडित जी घर से निकले और गली के सार्वजनिक नल पर रुककर हाथ धोने लगे। पंडित त्रिलोकीनाथ ने हाथ धोए और साफे से हाथ पोंछ लिए, फिर धोए और पोंछ लिए, फिर धोए और फिर पोंछ लिए। यह प्रक्रिया उन्होंने पूरे सात बार दोहराई।

कमलेश भट्ट ’कमल’ (हाइकु)

हाइकु रचनायें 

कौन मानेगा

सबसे कठिन है

सरल होना ?

* * *

समुद्र नहीं

परछाई खुद की

लांघो जो जानें।

* * *

मुझमें भी हैं

मेरी सात पीढ़ियां

तन्हा नहीं मैं।

* * *

वृक्षों ने चाही

हिस्से भर की धूप

सुखी रहे वे ।

* * *

है कोई रात

जिसका अभी तक

न हुआ प्रातः ?

* * *

सूर्य जिन्दा है

धुन्ध के उस पार

निराशा कैसी ?

- कमलेश भट्ट ’कमल’
कवि नगर, गाज़ियाबाद 

बेटियां (कविताएं)


एक

जीवन भर
सजाती हैं
अपनों का संसार!
न जाने क्यों
बेटियां
लगती हैं भार !


दो

समय
असमय
रोप दी जाती हैं
अजानी माटी में
धान की पौध की तरह!

जलवायु
अनुकूल हो या
प्रतिकूल
संभलना,
खिलना और
बिखरना
यही इनकी नियति है!
बेटियां
न जाने क्यों
अभागी होती हैं।

तीन


पीढी दर पीढी
मां ने सिखाया
बेटियों को
सिर्फ सहना!

दुःख हो या सुख
खुश रहना

अभावों को भी
समझ लेना
अपना ’सौभाग्य’ !

मां !
तुमने
क्यों नहीं सिखाया?
बेटी
सच को सच
झूठ को झूठ कहे
दुःख में भी
सुख में भी
तटस्थ रहे ?

ससुराल और
मायके जैसे
दो सशक्त तटों के
संरक्षण में
उन्मुक्त नदी सी
बहती रहे?













- कश्मीर सिंह
संप्रति - 
सहायक महाप्रबन्धक,
इंडियन ओवरसीज़ बैंक,
पटियाला 

साक्षात्कार - डा. छवि जैन

डा. छवि जैन  मुन्नालाल जयनारायण खेमका गर्ल्स डिग्री कॉलिज, सहारनपुर के कला संकाय में प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं।  "सहारनपुर जनपद के जैन मंदिरों में भित्ति अलंकरण"  विषय पर आपका शोध प्रबन्ध बहुत चर्चित रहा है और इस पर आपको Ph.D. के अतिरिक्त भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्‌ (Indian Council for Historical Research, New Delhi) से जूनियर रिसर्च फैलोशिप भी प्राप्त हुई है।  आप न केवल एक सिद्धहस्त कलाकार हैं अपितु लेखिका के रूप में भी आपने अपना एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है।  आपकी लगभग 20 कलाकृतियां पारंपरिक व लोकविषयक विषयों पर प्रदर्शित, प्रशंसित और पुरस्कृत हुई हैं व अनेक शोध पत्र विभिन्न पत्रिकाओं व ग्रंथों में प्रकाशित हुए हैं।   डा. छवि सहारनपुर की नयी पीढ़ी का न केवल प्रतिनिधित्व करती हैं बल्कि अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से सहारनपुर को एक श्रेष्ठ छवि भी प्रदान करती हैं।   
डा. छवि जैन से द सहारनपुर डॉट कॉम के  मुख्य संपादक की बातचीत के मुख्य अंश पाठकों के लिये प्रस्तुत हैं । 
सं. – डा. छवि जैन, सहारनपुर डॉट कॉम पोर्टल पर आपका हार्दिक स्वागत है। 
छवि - मैं आपकी हृदय से आभारी हॅूं कि आपने सहारनपुर डॉट कॉम वेब पोर्टलजैसे लोकप्रिय मंच पर मुझे आमंत्रित किया।  सहारनपुर डॉट कॉम के विश्व भर में फैले पाठकों को मैंहैलोकहना चाहती हूं

संछवि, कला में आपकी इतनी अधिक रूचि है, इस का श्रेय आप किसको देती हैंअपने लालन-पालन को? या आपको यह शौक अपने परिवार से आनुवांशिक रूप से मिला हैआपके परिवार में कलात्मक अभिरूचि और किनकिन की रही है?

छवि- पेंटिंग में इतनी रूचि मुझे अपने परिवार से ही मिली है और मैं आज जो कुछ भी कर पायी हूं या कर रही हूं उसका श्रेय सबसे पहले मैं अपनी मां को ही देना चाहूंगी।  मेरी मां बहुत सुन्दर पेंटिंग करती थी और जाने-अनजाने उन्हीं से मुझमें भी कलात्मक रूचि आयी।

सं. आपकी कलात्मक प्रतिभा को सवांरने, निखारने में किन लोगों का सबसे अधिक योगदान रहा है?

छविजैसा कि मैने अभी कहा, पेंटिंग में मेरी रूचि  तो मुझे अपनी मां से ही मिली है।  हां, इस रुचि को निखारने में निश्चय रूप से मेरे अध्यापकों का महत्वपूर्ण योगदान है। 

सं. - आप अपना रोल मॉडल किनको मानती हैं?

छविमेरी आदर्श मेरी गुरु श्रद्धेय डॉ. मधु जैन हैं, जिनको मैं अपना रोल मॉडल मानती हूं।

सं. आपने अपनी पीएच. डी. के लिये जो विषय चुना, उसकी कोई विशेष वज़ह थी?

छविमैं बचपन से ही अपने शहर के मंदिरों, विशेषकर जैन मंदिरों को कला के विद्यार्थी की नज़र से देखती आई हूं और इन मंदिरों में मौजूद कला मुझे अपनी ओर आकर्षित करती रही है।  जब पीएच.डी. का विषय चुनने की बात मन में आई तो सहसा खयाल आया कि क्यों नहीं अपने शहर के इन मंदिरों पर ही शोध किया जाये। 

सं. -  हमारे सहारनपुर शहर में इतना कुछ देखनेसमझने के लिये है किन्तु इस जनपद को कभी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं माना जाता।  क्या  लगता है आपको, क्या सहारनपुर में पर्यटन की दृष्टि से पर्याप्त संभावनायें हैं और इस जनपद को पर्यटन मानचित्र पर लाने हेतु प्रयास किये जाने चाहियें?

छविजी बिल्कुल! सहारनपुर नगर के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र में सामान्य लोग भी कई प्रकार के परम्परागत एवं कलात्मक कार्यों में संलग्न रहते हैं जिस कारण यहॉं अनेक प्रकार के शिल्पों का विकास हुआ। ये कलाकार हम सब के लिये अपरिचित ही हैं, अपने कार्यक्षेत्र से बाहर इनकी कोई विशेष पहचान भी शायद ही हो किन्तु इससे इनकी कला और प्रतिभा का महत्व कम नहीं हो जाता।  इनकी कला को प्रोत्साहन देने के लिये, दूरदूर तक पहुंचाने के लिये पर्यटन का बहुत बड़ा सहयोग हो सकता है।   मेरा दृढ़ विश्वास है कि इस दृष्टि से भी इस क्षेत्र में पर्यटन की सम्भावना खोजी जानी चाहिये।  सहारनपुर के काष्ठ कला उद्योग के बारे में तो देशविदेश में बहुत लोग जानते भी हैंसहारनपुर की काष्ठ कला पर्यटन को बढ़ावा देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

सं. क्या सहारनपुर में ऐसे कुछ प्राचीन मंदिर उपलब्ध हैं जो धार्मिक पर्यटन में रुचि रखने वाले लोगों को आकर्षित कर सकते हैं?

छवि - सहारनपुर बहुधर्मावलम्बी नगर है। इस नगर में तथा उसके आस-पास अनेक जैन, वैष्णव, शैव तथा शाक्त सम्प्रदायों के मंदिर तथा फकीरों की मजारें मौजूद हैं  जिनकी धार्मिक मान्यता तो है ही, साथ ही, वास्तुशिल्प और भित्ति-अलंकरण के लिये भी ये मंदिर महत्वपूर्ण हैं। यदि उन सभी पहलुओं को सही रूप में उजागर किया जाये तो  धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी इस क्षेत्र में पर्यटन की सम्भावनायें बढ़ सकती हैं।

सं. सहारनपुर को पर्यटन नगरी बनाने के मार्ग में क्या-क्या बाधायें आपको अनुभव होती हैं?

छवि- सहारनपुर में पर्यटन के संदर्भ में सबसे बड़ी बाधा यहां सफाई की कमी है। नगर के बीच में खुले गन्दे नाले केवल दुर्गंध का कारण हैं परन्तु उस कारण अनेक प्रकार की बीमारियॉं भी फैल सकती हैं। अतः यह अति आवश्यक है कि नगर को स्वच्छ बनाया जाये और गन्दे नालों को साफ करके उसमें बहते पानी की व्यवस्था हो यदि ऐसा किया जाये तो वह पर्यटन के लिये आकर्षण बन सकता है। सहारनपुर पौधों की नर्सरी के लिये आस-पास के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है - क्या ही अच्छा हो कि उन गन्दे नालों के आस-पास व्यावसायिक तौर पर फूलदार पौधे लगाये जायें। शहर में सड़कें, गली और कूचे केवल अव्यवस्थित हैं परन्तु तंग और टूटे-फूटे भी हैं। अतः उनको साफ-सुथरा और पक्का बनाया जाना अत्यन्त आवश्यक है। नगरवासियों को इन कमियों के बारे  में सचेत किया जाना चाहिये।

सं. -       सहारनपुर के जैन मंदिरों में प्राचीनतम मंदिर कौन-कौन से हैं? ये किस काल खंड के प्रतीत होते हैं
यदि इन मंदिरों की स्थापत्य कला या अलंकरण की तुलना देश में मौजूद अन्य मंदिरों से करनी हो तो किन मंदिरों से की जा सकती है?

छवि- ये सभी मंदिर सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी के ही हैं, जैसा कि उसके वास्तुशिल्प और भित्ति-अलंकरण से ज्ञात होता है।

सं. मूर्ति शिल्प और स्थापत्य की दृष्टि से नये और प्राचीन जैन मंदिरों में क्या कुछ विशेष अंतर दिखाई देते हैं?

छवि- क्योंकि ये सभी मंदिर सोलहवीं शताब्दी के बाद के ही हैं अतः उनके वास्तुशिल्प पर मुगल वास्तुशिल्प का प्रभाव स्पष्ट है और भित्ति-चित्रों के अलंकरण में भी वह प्रभाव उभरकर सामने आया है। बाद के बने भित्ति-चित्रों में अंग्रेजी प्रभाव भी देखने को मिलता है।

सं. क्या जैन मंदिरों में किसी भी धर्म के अनुयाइयों को प्रवेश की अनुमति उपलब्ध रहती है?

छवि -    जैन धर्म में किसी प्रकार का और किसी आधार पर भी भेद-भाव मान्य नहीं है। अतः उनमें सभी का स्वागत किया जाता है।

सं. - आप आजकल भी किसी विषय पर शोधपत्र की तैयारी में हैं क्या?

छवि - चित्रकला और लेखन में सिर्फ मेरी गहन रूचि है, बल्कि अब तो यह मेरा व्यवसाय भी है। अतः जब कोई निश्चित कार्य हाथ में हो तब भी मैं इच्छानुसार विभिन्न विषयों पर लेखन कार्य करती रहती हूं और चित्र भी बनाती रहती हॅूं।

सं. -  कला संकाय में प्रवक्ता के रूप में क्या आपने कुछ नये प्रयोग करने की कोशिश की है ताकि आपके विद्यार्थियों में कला क्षेत्र में कुछ अभिनव करने की इच्छा जाग्रत हो?

छवि - पारम्परिक चित्रकला में प्रतिदिन नये आयाम स्थापित होते रहते हैं क्योंकि आज की रचना-धर्मिता में एक्सपेरिमेंटेशन और मौलिकता को अधिक महत्व दिया जाता है। यह प्रक्रिया देश और काल के प्रभाव में सतत् और क्रमिक है। इसी संदर्भ में मेरा प्रयास लोक चित्रकला के अनेक बिम्बों को पाठ्यक्रम में सिखाई जाने वाली कलाओं में सम्मिलित करने का रहता है।

सं. आज आपसे बात कर कला के विषय में काफी कुछ जाननेसमझने को मिला।  हमें उम्मीद है कि हमारे पाठकों को भी आपसे यह भेंट बहुत रुचिकर रही होगी।   आपसे भविष्य में भी भेंट होती रहेगी, यह हमें आशा है।


छविजी अवश्यमुझे भी इस भेंट के दौरान अपनी रुचि के बारे में, अपने शहर के बारे में बात करके बहुत अच्छा लगा और यदि अवसर देंगे तो भविष्य में भी यह सिलसिला बनाये रख कर मुझे प्रसन्नता होगी   एक बार पुनः आपको धन्यवाद और सभी पाठकों को नमस्कार !  

जो विशेष पसन्द किये गये !