शुक्रवार, अगस्त 18

स्वतंत्रता दिवस पर कवि सम्मेलन और मुशायरा

सहारनपुर। 16 अगस्त !   आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में जिला प्रशासन द्वारा गंगा-जमुनी संस्कृति पर आधारित एक संयुक्त कवि सम्मेलन व मुशायरा यहां जनमंच सभागार में आयोजित किया गया। नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन सांसद राघव लाखनपाल शर्मा, जिलाधिकारी पी के पांडेय, एडीएम एसके दुबे, नगर विधायक संजय गर्ग, पूर्व मंत्री सरफराज खां व सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन राजेश जैन आदि ने दीप प्रज्ज्वलित व रिबन काटकर किया। कार्यक्रम की शुरुआत आसिफ शम्सी द्वारा नात और विनोद भृंग द्वारा सरस्वती वंदना से की गयी। प्रख्यात साहित्यकार कृष्ण शलभ की अध्यक्षता और सुरेश सपन के नायाब संचालन में रात करीब एक बजे तक डीएम पी के पांडेय व एसएसपी बबलू कुमार सहित बड़ी तन्मयता और संजीदगी के साथ बैठे रहे श्रोताओं ने कवि सम्मेलन व मुशायरे की सफलता की खुद ही इबारत लिख दी।




इस अवसर पर आजादी और कौमी एकता पर कवियों एवं शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम और रचनाएं पेश की। डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा और डॉ. आर पी सारस्वत ने अपने टप्पों से खूब तालियां बटोरी। सारस्वत का टप्पा देखिये-‘‘हम प्रेम पुजारी हैं, दुश्मन वार करे, हम सब पर भारी हैं।’’ विजेंद्रपाल का अंदाज ये था-‘‘हम प्रेम पुजारी हैं, कंस सामने हो तो कृष्ण मुरारी हैं।’’आबिद हसन वफा ने पढ़ा-इतना प्यारा वतन है हमारा, मुस्कुराता चमन है हमारा।’’ जबकि विनोद भृंग ने कुछ यंू कहा-‘‘धरा जल न जाएं गगन जल न जाए,ये फूलों सा खिलता चमन जल न जाए।’’ आसिफ शमसी भी इस शेर पर तालियां बटोर ले गए-‘‘प्यार मोहब्बत सिखलाता है मेरा हिन्दुस्तान, इसलिए तो दुनिया में है मेरा देश महान’’।वरिष्ठ शायर डॉ. इरशाद सागर ने समाजिक रिश्तों को कुछ इस तरह बयान किया-‘‘रिश्तों पे किसी के भरोसा नहीं रहा, अच्छा हुआ कोई भी धोखा नहीं रहा।’’ जबकि शब्बीर शाद का अंदाज कुछ ऐसा था-‘‘जख्म बातों के भरते नहीं, लोग कोशिश भी करते नहीं।’’



डॉ. वीरेन्द्र आज़म ने अपनी रचना ‘‘परछाई’’ के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक सरोकारों के साथ-साथ देश की अनेक समस्याओं को उठाते हुए जब ये पंक्ति पढ़ी-‘‘ये परछाई मुझे गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज ले जाती है, और वहां ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ते बच्चे दिखाती है’’ तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। सुरेश सपन ने अपने कई शानदार शेर पढ़े, बानगी देखिए-‘‘अपने घर का कोना-कोना अच्छा लगता है,हर कोने में खुशबु बोना अच्छा लगता है।’’ और कवि सम्मेलन उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब देश के जाने माने गीतकार राजेंद्र राजन माइक पर आए। उनके गीत की पंक्ति देखिये-‘‘ आंसुओं को संभालकर रखना,खुशबुओं को संभालकर रखना, वक़्त पूछेगा ज़िन्दगी क्या है, कुछ लम्हों को संभाल कर रखना’’। कृष्ण शलभ ने जब अपनी ग़ज़लें पढ़ी तो कार्यक्रम शिखर पर था। उनका एक शेर देखिए-‘‘ दीन के हैं ना ध्यान वाले हैं, यार ये सब दुकान वाले हैं।’’

video


इसके अलावा सिकंदर हयात, नरेंद्र मस्ताना, शिवराज राजू, हरीराम पथिक, गोकरण दत्त शर्मा, दानिश कमाल, असलम मोहसिन, अनुराधा शर्मा, मोहित संगम, नौशाद नक्श, जसबीर तन्हा, दिलबहार मलिक, अहमद फराज़ व बरकतउल्ला शाद आदि ने भी अपनी रचनाएं व कलाम पेश किये। बाद में जिलाधिकारी पी के पांडेय, एसएसपी बबलू कुमार, एसपी सिटी प्रबल प्रतापसिंह,नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार, सीओ सुरेंद्र कुमार, राजेश जैन व सरफराज आदि ने कवियों का शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन और सम्मानचिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में दलजीत कोचर, शीतल टंडन, अरिमर्दन सिंह गौर, आमिर खां एडवोकेट, मौलवी फरीद, दीनानाथ शर्मा, दानिश आजम, राव असलम, राधेश्याम नारंग, महेश नारंग, साइक्लिस्ट बाबूराम सैनी, सुबोध शर्मा एड, व सगीर अहमद आदि शामिल रहे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

जो विशेष पसन्द किये गये !