मंगलवार, अगस्त 29

11 सितंबर से पांवधोई की पुनः सफाई का संकल्प



सहारनपुर के जिलाधिकारी प्रमोद कुमार पाण्डेय पांवधोई बचाव समिति  से विचार विमर्श करते हुए 

सहारनपुर : 28 अगस्त 2017 – सहारनपुर कलक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी पी.के. पाण्डेय द्वारा आहूत पांवधोई बचाव समिति की बैठक में कई वर्ष से तिरस्कृत चल रही पांवधोई नदी के पुनरुद्धार को लेकर आज पुनः मंथन हुआ।

आज की बैठक में पांवधोई बचाव समिति के जिलाधिकारी सहित सारे पदेन सदस्य नये थे जिनका कुछ वर्ष पूर्व चलाये गये पांवधोई बचाव आन्दोलन से प्रत्यक्ष या परोक्ष कोई संबंध नहीं रहा था। ऐसे में सबसे पहले जिलाधिकारी ने सभी स्थाई सदस्यों से पांवधोई बचाव समिति की पूर्व में चलाई गयी गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्र की। उपसचिव डा. शर्मा ने जहां पांवधोई नदी के उद्‌गम और पूर्व में चले अभियान व उपलब्धियों से जिलाधिकारी को अवगत कराया, वहीं सुशान्त सिंहल ने कहा कि पांवधोई नदी सिर्फ जिलाधिकारी की सक्रियता पर निर्भर रहेगी तो नदी की स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी। जरूरी ये है कि हम नदी के दोनों तटों पर निगरानी समितियों का पुनः गठन करें और उनको ही अपने अपने क्षेत्र में सफाई बनाये रखने की जिम्मेदारी दें। पांवधोई बचाओ समिति का कार्य सिर्फ इतना होना चाहिये कि वह निगरानी समितियों की सहायता करे और समेकित योजना बना कर नदी में जल का प्रवाह सुनिश्चित करे, नदी का सौन्दर्यकरण करे। पांवधोई बचाव समिति के पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी ने पांवधोई नदी के पुनरुद्धार के मार्ग में आने वाली समस्याओं को समझने का प्रयास किया ताकि तदनुरूप कार्ययोजना बना कर उस पर त्वरित गति से कार्य आरंभ किया जा सके।



पांवधोई नदी को लेकर जो चुनौतियां सहारनपुर वासियों के सम्मुख हैं, उनका ज़िक्र करना हो तो

1. ग्राम सकलापुरी यानि पांवधोई के उद्‍गम स्थल पर जल का प्रवाह बढ़ाने की आवश्यकता,

2. नदी के दोनों किनारों पर अतिक्रमण व कूड़ाघर हटाना,

3. नदी में गिरने वाले ठोस कचरे को गिरने से रोकना,

4. नदी के दोनों तटों पर सीवर लाइनों को पुनः चालू कराना,

5. नदी में गिरने वाले 98 सरकारी नालों का प्रवाह सीवर लाइन की ओर करना,

6. नदी के तटों पर लगाई गयी जाली की मरम्मत कराना,

7. निगरानी समितियों को पुनः सक्रिय करना,

8. जनजागृति अभियान चलाना,

9. नदी में जमा गन्दगी को बाहर निकालना व

10. नदी का सौन्दर्यकरण

आदि शामिल हैं। आज की बैठक में तय किया गया कि क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ते हुए इन सभी समस्याओं का निराकरण किया जायेगा और जो भी समस्याएं आयेंगी, जिलाधिकारी शासन के स्तर पर उनका समाधान कराने का भरसक प्रयास करेंगे। अभियान की शुरुआत निगरानी समितियों की बैठकों से की जायेगी जिसके बाद सभी निगरानी समितियों की एक रैली भी निकाली जायेगी।

इस बैठक में बोलते हुए जिलाधिकारी प्रमोद कुमार पांडेय ने नगरवासियों, दुकानदारों, फल व सब्ज़ी विक्रेताओं से आग्रह किया है कि वह पांवधोई व ढमोला नदी में न तो कूड़ा डालें और न ही अतिक्रमण करें। अतिक्रमण के लिये उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को आदेश दिया कि वह तुरन्त नोटिस देकर अतिक्रमण हटवाएं और आदेश का पालन न करने वालों पर एफ.आई. आर. दर्ज़ कराई जाये। उन्होंने सिंचाई विभाग को ये आदेश भी दिया कि नदी के तटों को पक्का करने का जो प्रस्ताव 2014 में शासन को भेजा गया था, उसे पुनः नगर विकास विभाग को भेज कर स्वीकृत कराया जाये। गंदा पानी और कूड़ा डालने वालों के चालान काटे जायें और जुर्माना वसूल किया जाये।

पांवधोई का सफाई अभियान 11 सितंबर से चलाया जायेगा। इसमें सफाई के अलावा क्षेत्रवासियों के साथ मिल कर रैली भी निकाली जायेगी।

आज की बैठक में जिलाधिकारी पी.के. पांडेय, एडीएम ई एस के दुबे, नगर आयुक्त गौरव वर्मा, नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार, सहारनपुर विकास प्राधिकरण के सचिव एस.पी. शर्मा व ए.के. माथू, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता मोहित कुमार, प्रदूषण नियंत्रण विभाग के जे.बी.सिंह, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ए पी सिंह, अल्पना तलवार, ए.सी. पपनेजा, वीरेन्द्र कुमार शर्मा ’पम्मी’, कुलभूषण कुमार जैन, डा. पी.के. शर्मा, मेजर के.एस. सिंह आई.टी.सी., शीतल टंडन, सुशान्त सिंहल, वीरेन्द्र आज़म, आमिर खान और मौलवी फरीद ने सक्रिय भाग लिया। राजस्थान पत्रिका के शिव मणि त्यागी ने व द सहारनपुर डॉट कॉम के सुशान्त सिंहल ने पांवधोई बचाव आन्दोलन को जन-जन तक पहुंचाने में सोशल मीडिया के अपरिमित महत्व को देखते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उल्लेखनीय है कि द सहारनपुर डॉट कॉम सहित नगर के सभी समाचार पत्रों ने पहले भी पांवधोई बचाओ आन्दोलन की इतनी धूम मचाई थी कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 24 जिलाधिकारियों को आदेश दिये थे कि वह भी सहारनपुर की तर्ज़ पर अपने अपने जनपद की नदियों को साफ करायें।

पांवधोई बचाओ आन्दोलन का इतिहास

संभवतः आपको याद हो कि 12 मई 2010 को तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक कुमार की पहल पर 22 सदस्यीय पांवधोई बचाव समिति का गठन किया गया था जिसमें जिलाधिकारी, एडीएम (ई), नगर आयुक्त, सहारनपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम के अधिशासी अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, सिंचाई विभाग, यमुना एक्शन प्लान, लोक निर्माण विभाग, जलकल विभाग आदि विभिन्न सरकारी विभागों से 11 पदेन सदस्य थे और 11 स्थाई सदस्य जनता के मध्य से नामित किये गये थे जिनमें डा. एस.के. उपाध्याय, प्रमोद कुमार शर्मा, कुलभूषण जैन, प्रो. पम्मी शर्मा, सुशान्त सिंहल, डा. वीरेन्द्र आज़म, अल्पना शर्मा तलवार, ए.सी. पपनेजा, आमिर खान, मौलवी फरीद व शीतल टंडन थे।

जिलाधिकारी आलोक कुमार के सहारनपुर से स्थानान्तरण के बाद पांवधोई बचाव समिति नगर आयुक्त डा. नीरज शुक्ला के नेतृत्व में कुछ दिन तक कार्य करती रही पर बाद में आने वाले विभिन्न जिलाधिकारियों ने पांवधोई के जीर्णोद्धार में कोई रुचि नहीं ली और धीरे – धीरे पांवधोई की स्थिति लगभग पहले जैसी ही हो गयी। पांवधोई बचाव समिति के सदस्य भी सिर्फ तब ही सक्रिय हुए जब जिलाधिकारी अथवा नगर आयुक्त ने सक्रियता दिखाई।  

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