रविवार, अगस्त 6

कमलेश भट्ट ’कमल’ (हाइकु)

हाइकु रचनायें 

कौन मानेगा

सबसे कठिन है

सरल होना ?

* * *

समुद्र नहीं

परछाई खुद की

लांघो जो जानें।

* * *

मुझमें भी हैं

मेरी सात पीढ़ियां

तन्हा नहीं मैं।

* * *

वृक्षों ने चाही

हिस्से भर की धूप

सुखी रहे वे ।

* * *

है कोई रात

जिसका अभी तक

न हुआ प्रातः ?

* * *

सूर्य जिन्दा है

धुन्ध के उस पार

निराशा कैसी ?

- कमलेश भट्ट ’कमल’
कवि नगर, गाज़ियाबाद 

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