शनिवार, अगस्त 5

निर्मल जोत जले मन मन में।

निर्मल जोत जले मन मन में।

कटे अन्‍धतम, हो उजि‍यारा
नव नव दीप जले जीवन में।


पात पात झूमे हरि‍याली
सुरभि‍त सुमन खि‍ले उपवन में।

तप्‍तधरा खण्‍ि‍डत आशायें
चन्‍दन-घन बरसे तृण-तृण में।

नि‍ज से उपर, पर में लय हों
नि‍श्‍छल गीत लि‍खें कण कण में

नयन-नयन वि‍श्‍वास तरल हो
मंगल घट छलके ऑंगन में।

- डा. रागिनी भूषण

संप्रति -

अध्यक्ष, संस्कृत विभाग
Graduate's College for Women
Jamshedpur
Phone : 0657 - 2227857

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