मंगलवार, अगस्त 22

राजेन्द्र राजन के ग़ज़ल संग्रह ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ का लोकार्पण

हिन्दी वालों ने ग़ज़ल का नुकसान नही किया वरन्‌ उसका सौंदर्य बढ़ाया है: अश्वघोष



सहारनपुर। देश के प्रख्यात गीतकार राजेन्द्र राजन के ग़ज़ल संग्रह ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ का लोकार्पण एक भव्य समारोह में जीपीओ रोड स्थित एक सभागार में किया गया। अध्यक्षता देहरादून से आये प्रख्यात साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने की।


लोकार्पण कार्यक्रम का शुभारंभ नरेन्द्र मस्ताना द्वारा सरस्वती वंदना गायन व अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वल से हुआ।  

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि गीत में एक केंद्रीय भाव को लेकर निर्वहन किया जाता है, जबकि ग़ज़ल में स्वतंत्रता होती है। राजेंद्र ’राजन’ की ग़ज़लों में मुहावरेदारी का दर्शनीय प्रयोग हुआ है। जो वह गीतों में नहीं कह पाये वह उन्होंने ग़ज़ल में कहा है। अभी तक उनका गीतों पर हक था लेकिन अब उन्होंने ग़ज़लों पर भी कब्ज़ा कर लिया है। 

प्रख्यात ग़ज़लकार डॉ. अश्वघोष ने कहा कि ग़ज़ल एक सर्वग्राह्य विधा है, हिन्दी के जिन लोगों ने ग़ज़ल लिखना शुरु किया उन्होंने ग़ज़ल का नुकसान नहीं किया बल्कि उसका सौंदर्य ही बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि राजन की ग़ज़लों में जबरदस्त कहन तो है ही साथ ही उनमें टूटते सामाजिक मूल्यों और टूटते रिश्तों के अलावा बाज़ारवाद तथा अन्य सामाजिक सरोकार भी दिखायी देते हैं। 

भोपाल से आये वरिष्ठ गीतकार दिनेश प्रभात ने राजन की ग़ज़लों को विशुद्ध 24 कैरेट की बताते हुए कहा कि सामाजिक सरोकारों को लेकर उनकी छटपटाहट आकाश छू लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि ग़ज़ल कम शब्दों में ज्यादा बात करती हैं।

‘‘मुझे आसमान देकर...’’ पुस्तक के रचनाकार राजेन्द्र ’राजन’ ने कहा कि गीत का स्वरुप किसी जूड़े में टांके गए फूल की तरह है और ग़ज़ल सेज पर फूल की पत्तियों के बिखराव का सौंदर्य है। उन्होंने कहा कि मेरी ग़ज़लें मेरे अहसास से टपकती हुयी बूंदों का लिखित बयान हैं।


कृपया देखें अब्दुल्ला रहमान के द्वारा शेयर की गयी उक्त वीडियो 
गायिका - कु. आशा शर्मा

इस अवसर पर संजीव झिंगरन ने लोकार्पित संग्रह से दो ग़ज़लों के संगीत के साथ सस्वर पाठ व कु. आशा द्वारा एक ग़ज़ल की प्रस्तुति ने माहौल में समां बांध दिया।  संस्थाध्यक्ष कृष्ण शलभ ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. आर पी सारस्वत ने किया। 

समारोह में जीएम बीएचइएल संत कुमार, प्रख्यात साहित्यकार प्रदीप जैन, अनुराधा शर्मा, सुरेश सपन, एस के सैनी, शिवराज राजू, बसंत सिंह एडवोकेट, पूर्व विधायक सुरेन्द्र कपिल, शिव गौड़, जावेद खां सरोहा, डॉ. इरशाद सागर, जावेद अरसी, आसिफ शम्सी, सुनील जैन राना, हरीराम पथिक, गोकरणदत्त शर्मा, विनोद भृंग, शिवराज राजू, डॉ. वीरेन्द्र आज़म, अजय भारद्वाज, श्रीमती विभा शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, नरेन्द्र शर्मा, विपिन शर्मा, मोहित संगम, विपिन गिरी, कुमार पल्लव, प्रशांत राजन, डॉ.सपना सिंह, श्रद्धानंद शर्मा व देशराज शर्मा आदि शामिल रहे।


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