बुधवार, अगस्त 16

सहारनपुर - एक आकर्षक पर्यटन स्थल

उत्तर प्रदेश में जब पर्यटन की बात होती है तो सहारनपुर को इस दृष्टि से निर्धन मान कर हमेशा उपेक्षित कर दिया जाता है। प्रदेश की पर्यटन संबंधी पुस्तकों को सहारनपुर का नाम नगण्य है। देश-विदेश के पर्यटक सहारनपुर के निकटवर्ती देहरादून, मसूरी, हरिद्वार और ऋषिकेश घूमने आते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में सहारनपुर घूमे बिना चले जाते हैं। यह सहारनपुर के लिये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

सहारनपुर सदियों से समृद्ध क्षेत्र रहा है। सहारनपुर नगर मुगलकाल में बसा है लेकिन सरसावा, बेहट, देवबन्द, नकुड़ नगर महाभारतकालीन हैं। यहां घने वन होने के कारण पांडवों ने अपना अज्ञातवास इसी क्षेत्र में बिताया था। 


यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से कभी निर्धन नहीं रहा है।  राजा हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आये चीनी यात्री ह्वेनसांग ने इस क्षेत्र का विशद वर्णन किया है।  ह्वेनसांग यमुना के के निकट स्त्रुग्न नगर आया था और वहां सरसावा को होता हुआ बेहट पहुंचा।  उसने इस पूरे क्षेत्र में 100 देव मंदिर देखने का वर्णन किया है।  जिस क्षेत्र ने चीनी यात्री को अपनी सुन्दरता से मंत्रमुग्ध कर दिया हो, भला वह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से निर्धन कैसे हो सकता है?

बाबरनामा में ज़िक्र है कि पानीपत की लड़ाई से पहले बाबर ने अपना पड़ाव सरसावा में एक सुगंधित सरोवर के निकट डाला था।  बाबर ने इस क्षेत्र को बेहद खूबसूरत कहा था। बाबर ही क्यूं, फिरोज़ तुग़लक ने अपने शासन काल में सर्वाधिक कार्य इसी क्षेत्र में कराये।  ताजमहल जैसी इमारत बनाने वाला बादशाह शाहजहां भी इसकी खूबसूरती से इतना प्रभावित हुआ कि उसने शिवालिक की मनोरम तलहटी में शिकारगाह बनवा दी जिसके अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं।  

जहां मां शाकुंभरी देवी जैसा पवित्र और प्राचीन स्थल हो, जहां दारुल उलूम जैसा विश्वविख्यात शिक्षा केन्द्र हो, मोहंड जैसा जंगल हो, सहंस्त्रा ठाकुर जैसे प्रकृतिस्थ स्थली हो और हुलास जैसे सिंधुकालीन गृह आवासों के अवशेष हों तो उसे पर्यटन की दृष्टि से निर्धन नहीं कहा जा सकता।

सहारनपुर पर्यटन की दृष्टि से बेहद समृद्ध है। कलाप्रेमियों के लिये यहां अनेक मंदिरों और हवेलियों पर अद्‌भुत और अनूठे भित्तिचित्रों की बड़ी श्रंखला है। हुलास, सरसावा का टीला, खुजनावर गांव में कुषाण कालीन अवशेष, मल्हीपुर क्षेत्र में बिखरे अवशेष पुरातत्व खोजियों को पुकार रहे हैं।  पर्वतीय क्षेत्रों का आनन्द उठाने वालों के लिये सहंस्त्रा ठाकुर एक अनूठी यात्रा है। इस यात्रा में भरपूर रोमांच है। यहां झरनों, पोखरों या बहती हुई जलधाराओं में स्नान करना अतीव ऊर्जा प्रदान करता है। शिवालिक में कोठड़ी गांवों की श्रंखला में और वन गुर्जरों की कठोर जीवन शैली से भी रूबरू हुआ जा सकता है।

शाकुंभरी देवी से बादशाही महल की ओर जाने वाला मार्ग भी रोमांचकारी है। खंडहर हो चुके बादशाही महल (बादशाही शिकारगाह) की खिड़कियों से शिवालिक में बहने वाली हवाओं का आनन्द लेना निःसन्देह अद्‌भुत क्षण रहेगा। फिरोज़ तुग़लक के शासनकाल में यहां गैंडा भी पाया जाता था।

काष्ठशिल्प को लेकर सहारनपुर का नाम विदेशों में जाना जाता है। यहां लकड़ी बाज़ार में लकड़ी से बनाई गयी एक से बढ़कर एक कलाकृतियां हैं।  पांवधोई नदी का उद्‌गम स्थल और इसका प्राकृतिक वनस्पतियों से आच्छादित किनारा भी दर्शनीय है। 

हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, जैन और सिखों के लिये धार्मिक दृष्टि से अनेक स्थल दर्शनीय और पूजनीय हैं। देवबन्द स्थित बाला सुन्दरी मंदिर, बरसी स्थित महाभारत कालीन शिवालय, सरसावा स्थित प्राचीन वनखंडी महादेव, सोना अर्जुनपुर गांव स्थित बाबा सिद्ध का मन्दिर, रणदेवा स्थित संत प्यारे जी महाराज का मंदिर, बाबा लालदास का बाड़ा, नगर में स्थित श्री भूतेश्वर महादेव, बागेश्वर महादेव, शकलापुरी स्थित शंकलेश्वर महादेव, मानकमऊ स्थित गुग्घा महाराज की म्हाड़ी, नकुड़ स्थित नकुलेश्वर महादेव आदि स्थल हिन्दू दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। 

देवबन्द स्थित इस्लामी शिक्षा का विश्वविख्यात केन्द्र दारुल उलूम, इसी प्रांगण में स्थित रशीदिया मस्जिद, गंगोह में बनाई गयी मस्जिद, नगर के भीगर स्थित जामा मस्जिद और अरबी मदरसा, रायपुर गांव में स्थित मस्जिद, अम्बेहटा की मस्जिद आदि स्थल मुस्लिम दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। 

जैन धर्मावलंबियों के लिये सहारनपुर में अनेक स्थल हैं। नगर में अनेक पुराने जैन मंदिर और चैत्यालय भी आकर्षक हैं। यहां मन्दिरों पर बेहतरीन भित्तिचित्र बरबस ही आकर्षित कर लेते हैं।  सुल्तानपुर स्थित प्राचीन मंदिर, सरसावा स्थित मंदिर, टिकरौल गांव स्थित मंदिर भी जैनधर्म के महत्वपूर्ण स्थल हैं। 

ईसाई धर्म की बात करें तो सहारनपुर में ब्रिटिश काल के दौरान कई चर्च बनाई गयी थीं। ये सभी पश्चिमी स्थापत्य कला का बेहतरीन नमूना हैं। 

सिख धर्म की दृष्टि से सहारनपुर में सबसे महत्वपूर्ण स्थल है गांव पनियाली कासिमपुर का गुरुद्वारा। यहां दशम गुरु स. गोविन्द सिंह ने प्रवास किया था। सहारनपुर में मुख्य गुरुद्वारा थाना कुतुबशेर के निकट स्थित है। इसके अलावा भी नगर में अनेक गुरुद्वारे हैं।

स्वयं पर करना होगा गर्व

ह्वेनसांग, मेगस्थनीज़ और अलबरूनी सहारनपुर जनपद से होकर ही गुजरे थे। इन्होंने सरसावा, बेहट और यमुना तट का विस्तृत वर्णन किया है। यदि हज़ारों मील दूर देश से आने वाले व्यक्ति हमारे देश की खाक छान सकते हैं तो क्या अपने जनपद से भी अनभिज्ञ रहना हमारी सबसे बड़ी अज्ञानता नहीं है? गलती हमारी भी है और हमें पढ़ाये गये उस पाठ्यक्रम की भी, जिसमें हमारे स्थानीय गौरव के लिये दो शब्द भी नहीं लिखे गये! हमें बोस्टन टी पार्टी और लाल क्रांति तो पढ़ाये जाते हैं लेकिन हमारे जनपद के इतिहास और संस्कृति को लेकर हमारी पाठ्यपुस्तकें मौन हो जाती हैं।

सहारनपुर जनपद के जो छात्र इतिहास विषय पढ़ते हैं उनके लिये इससे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति क्या होगी कि उन्हें दुनिया का इतिहास पढ़ने और रटने के बाद भी सहारनपुर के इतिहास को लेकर अ-ब-स भी नहीं आता है। जब अपने जनपद का इतिहास पढ़ा ही नहीं तो उसके प्रति तीव्र जिज्ञासा पैदा होगी ही कैसे? जब अपने जनपद के गौरवमयी स्थलों की जानकारी ही नहीं तो उनके बारे में सोचकर सीना चौड़ा होगा ही कैसे? हम गुलामी के आदी हो गये हैं, हमें जो पढ़ाया गया, वही हमने पढ़ लिया, हमें जो समझाया गया, हमने वही समझ लिया। हमने कभी जिज्ञासापूर्वक यह प्रश्न नहीं किया कि अमेरिका का इतिहास पढ़ाने वाले गुरुजनों! सहारनपुर का इतिहास कहां है? ब्रिटेन की क्रांति को समझाने वालों, सहारनपुर के क्रांतिकारियों की जानकारी कहां है? यदि हमने यह प्रश्न आज से दो दशक पहले भी पूछ लिया होता तो आज हम देश-दुनिया के समक्ष गौरवपूर्ण आत्मबल के साथ खड़े हो सकते थे। अगर हम आज भी नहीं जागे तो फिर बहुत देर हो जायेगी। आने वाली पीढ़ी को स्वत्व पर गर्व हो सके, इसके लिये हमें अभी से साधना करनी होगी। हमें दुनिया के इतिहास, संस्कृति और सभ्यता से पहले अपने इतिहास, संस्कृति और सभ्यता पर गर्व करना सीखना होगा। हमें ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करना होगा जिससे आने वाली पीढ़ी अपने सहारनपुर के विषय में जानकारी के लिये किसी की आश्रित न हो। जब बच्चे अपने गृह जनपद के स्वर्णिम इतिहास को जानेंगे तो गौरवान्वित भी होंगे। गौरवान्वित होंगे तो पैदा होंगे यायावर और फिर निकल पड़ेगी यायावरों की फौज। वे अपने जनपद के गांव-गांव दस्तक देंगे और खोजेंगे अनछुए सहारनपुर को……

निस्संदेह मैं उस पल की कल्पना भर से रोमांचित हूं। आप युवा हैं तो मेरी बात मानिये। बैठिये मत, बैठने की जिम्मेदारी बुज़ुर्गों को दे दीजिये। समय निकालिये अपने जनपद के पर्यटन स्थलों को देखने के लिये। जब आप सहारनपुर जनपद के इन स्थलों से परिचित होंगे तो आपको लगेगा कि दूर-दूर तक की गयी यात्राएं भी इनके आगे फीकी हैं। दुनिया को भूल जाइये और निकल पड़िये अपने सहारनपुर दर्शन के लिये, फिर देखिये आपको कितना आनन्द आता है इस यात्रा में ….


राजीव उपाध्याय
ग्राम व पत्रालय – सौराना, जिला सहारनपुर
फोन – 9358445959, 8445138001
Email : rajeevupadhyaypress1983@gmail.com

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