गुरुवार, अगस्त 10

अदाकार ग्रुप ADACAR Group

ACTION FOR DRAMATIC ADVANCEMENT, CREATIVE ARTS RESEARCH (ADACAR) 

(स्थापना : वर्ष 1984)
स्व. मसरूर खां सरोहा की स्मृति में अदाकार ग्रुप की स्थापना प्रख्यात रंगकर्मी श्री जावेद खान सरोहा द्वारा की गई थी जो लेखन, अभिनय, निर्देशन, प्रकाश व मंच निर्माण आदि रंगमंच की विभिन्न विधाओं में गहरी रुचि एवं पकड़ रखते हैं। अदाकार ग्रुप के प्रमुख रंगकर्मी शम्स तबरेज़ ( लेखन, अभिनय, निर्देशन), डा. एम. रोशन (अभिनय, निर्देशन), वसीउर्रहमान (निर्देशन, अभिनय), बी. पी. सिंह, रईस अहमद, मजाज उल हक़, प्रदीप पाराशर, असलम अंसारी, पवन शर्मा, विक्रान्त जैन, मुकेश मानकटाला, संजीव मिलवानिया, अशोक वर्मा, अनुपमा भूषण, रोज़ी कालिया, कु. सोनू कौर, बिन्दर कौर, मीनाक्षी डाबर, आभा गौतम, रोमा मोघा, आभा मित्तल, निष्ठा शर्मा, प्रतिष्ठा शर्मा, डा. वी. के. आत्रे, संदीप शर्मा, हरि ओम कालड़ा, कनिका शर्मा, अंजलि भारद्वाज, श्रीमती करुणा प्रकाश, सुहैल अख्तर, शहीम परवेज़, आकाश तोमर, शीशपाल सिंह , मुसव्विर अली खां, प्रतिभा श्रीवास्तव, नवनीत वर्मा, पंकज मल्होत्रा, प्रशान्त ’आज़ाद’, नितिन, पिंकी गुप्ता, पल्लवी वशिष्ठ, शचि अग्रवाल, गुंजन मक्कड़, यामिनी शर्मा, शाहिद इकबाल, शान सिद्दिकी, कुलदीप दीक्षित, शीतल त्यागी, अनुभव भल्ला आदि हैं। अदाकार ग्रुप से अपनी रंगकर्म यात्रा शुरु करने वाले अनेकानेक रंगकर्मी आज फिल्म व टी.वी. के स्थापित कलाकार हैं।

मंचित मुख्य नाटक 

महमूद गज़नवी, दिल्लगी, आवागमन ( तीनों के लेखक शम्स तबरेज़), मगरमच्छ के जूते, और फिर, एक था हामिद, चांची चटखारी, काक भगोड़ा, मां तुझे सलाम, , (नुक्कड़ नाटक) ( लेखक, निर्देशक जावेद खान सरोहा) कायाकल्प, किसका हाथ, एक से बढ़ कर एक, बेबी तुम नादान, काल कोठरी, सबसे उदास कविता, आधे अधूरे, मेरी बीवी वंडरफूल, हम सफर, एक बेचारा प्यार का मारा, संजोग, गिद्ध, जिस लाहौर नी वेख्या ओ जन्मया ही नहीं, महानिर्वाण, शतरंज के खिलाड़ी, ताजमहल का टैंडर, सिंहासन खाली है, हाशिया, किस्सा गोई, एक अनार – दो बीमार ।

मंचित नुक्कड़ नाटक 

फैसला आपका, ओए... बिजूका, और गांधी खो गये, समझदारी, क्या हम आज़ाद हैं? ( लेखक, निर्देशक जावेद खान सरोहा) अदाकार ग्रुप द्वारा रुड़की, देहरादून, देवबन्द, नकुड़, गंगोह, यमुनानगर, मथुरा, मेरठ, दिल्ली, चंडीगढ़, आगरा में नाटक मंचित किये गये। संस्थापक अध्यक्ष श्री जावेद खान सरोहा के निर्देशन में गिद्ध, पगला घोड़ा, पंछी ऐसे आते हैं, सिंहासन खाली है, छिप्पन तो पहले नाटक चंडीगढ़ में किये गये। अनेक रंगशालाओं का आयोजन भी किया गया। जावेद खान सरोहा ने नटराज रुड़की के तत्वावधान में मंचित नाटक - खामोश अदालत जारी है, कंजूस, कालकोठरी, Mock Doctor, पगला घोड़ा, दिमागे हस्ती दिल की बस्ती, आधी रात के बाद आदि अनेक नाटकों में निर्देशन तथा प्रकाश व्यवस्था का दायित्व संभाला । स्थानीय जनमंच प्रेक्षागृह के जीर्णोद्धार के लिये अदाकार ग्रुप द्वारा आधे अधूरे नाटक का विशेष मंचन किया गया। तत्कालीन जिलाधिकारी श्रीमती आराधना शुक्ला के माध्यम से इक्कीस लाख रुपये प्रदेश सरकार से प्राप्त होने में अदाकार ग्रुप का भी योगदान रहा। अदाकार ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष जावेद खान सरोहा की परिकल्पना, लेखन एवं निर्देशन में हजरत अमीर खुसरो कल्चरल सोसायटी एवं अदाकार ग्रुप के संयुक्त प्रयास के रूप में उर्दू जुबान की सात सौ साला तारीख पर आधारित नाटक ’तमसीली मुशायरा’ के ऐतिहासिक मंचन 1988-89 में किये गये जिसे 30,000 से भी अधिक दर्शकों द्वारा देखा और सराहा गया।

रजत जयंती वर्ष के विशेष आयोजन 

अपने स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर अदाकार ग्रुप ने वर्ष भर में किये जाने वाले रंग आयोजनों की एक श्रृंखला तैयार की है जिसके अन्तर्गत प्रत्येक माह रंगमंच विधा की विभिन्न शैलियों पर आधारित प्रस्तुतियों का मंचन किया जायेगा जैसे - नाटक, नुक्कड़ नाटक, लघु नाटक, नृत्य नाटिका, एकल अभिनय, कठपुतली रंगमंच, माइम थियेटर, बाल रंगमंच, पारसी थियेटर, कहानी एवं कविता मंचन आदि। इस श्रृंखला में कहानी, लघु नाटक एवं माइम प्रस्तुति अभी हाल में दी जा चुकी हैं।

अदाकार ग्रुप के नाटकों के कुछ दृश्य जो हमारे पास उपलब्ध हैं - 

Jal - the Web

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Sabse Bada Sawal

Jin Lahore ni vekhya, vo janmaya hi nahin. 

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संपर्क सूत्र -
अदाकार ग्रुप, 12/944, दाउद सराय, सहारनपुर । फोन - 0132 - 2648165; +91 94576 48305 |

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