गुरुवार, मई 17

यातायात सुरक्षा अभियान

सहारनपुर - 17 मई - आरोन एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी (रजि.)  और द सहारनपुर डॉट कॉम ने आजकल विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के बीच जाकर उनको यातायात सुरक्षा के प्रति सजग करने और हेल्मेट के उपयोग के लिये उनको प्रोत्साहित करने का अभियान छेड़ा हुआ है।  दि. 15 मई को के.एल. जी. पब्लिक स्कूल शारदा नगर और डेलमोंड इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, छुटमलपुर के छात्र - छात्राओं के लिये कार्यक्रम आयोजित किये गये और दि. 16 मई को जनता रोड स्थित हाईलैंड हॉल पब्लिक स्कूल में सेमिनार का आयोजन हुआ।   आज 17 मई 2018 को दिल्ली पब्लिक स्कूल में इसी विषय पर सेमिनार चल रही है। 

आरोन एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी की अध्यक्ष रश्मि टेरेंस ने इस अभियान के बारे में बताया कि जिला प्रशासन, संभागीय सड़क परिवहन अधिकारी व पुलिस विभाग की पहल पर आरोन एजुकेशनल वेल्फेयर सोसायटी ने  यह अभियान आरंभ किया है जिसका उद्देश्य दो पहिया वाहन चालकों में हेल्मेट की महत्ता को लेकर जागृति लाना है।  इसके लिये हम विभिन्न विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों से संवाद स्थापित कर रहे हैं।

वहीं द सहारनपुर डॉट कॉम के संस्थापक तथा आरोन एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी के सचिव सुशान्त सिंहल ने कहा कि विद्यार्थियों से वार्तालाप करते समय यह बात स्पष्ट हो रही है कि विद्यार्थियों को जितना जागृत करने की जरूरत है, उससे भी कहीं अधिक उनके माता-पिता को भी जागृत करने की आवश्यकता है जो अपने अल्पवय बच्चों के हाथ में स्कूटर और भारी भरकम बाइक सौंप रहे हैं। ऐसे अभिभावकों की सोच बड़ी विचित्र अनुभव है।  पड़ोस में यदि किसी व्यक्ति ने अपने बच्चे को बाइक दिलाई है तो दूसरे अभिभावक अपने स्टेटस और सामाजिक प्रतिष्ठा की चिन्ता करने लगते हैं और अपने बेटे को और भी भारी बाइक दिलाने की सोचते हैं ताकि समाज में उनका रुतबा कायम हो सके।  कुछ माता - पिता का तो ये भी तर्क होता है कि यदि बच्चे के सब दोस्तों के पास बाइक है और उनके बेटे के पास न हो तो वह हीन भावना का शिकार हो जाता है।  इसलिये उसे भी बाइक दिलानी जरूरी है।   खेद की बात ये है कि उनको इस बात का कहीं किसी स्तर पर विचार ही नहीं आता है कि बाइक कोई खिलौना नहीं है जिसे बच्चे को खेलने के लिये दिया जा सके।  बाइक एक यंत्र है जो गलत ढंग से उपयोग किये जाने पर बच्चे की जान भी ले सकता है।  अपने बच्चे को ’हीन भावना से बचाने के लिये’ अभिभावक यह भी नहीं सोच रहे हैं कि बाइक चलाने के लिये ड्राइविंग लाइसेंस की भी जरूरत होती है और ड्राइविंग लाइसेंस लेने के लिये न्यूनतम 18 वर्ष की आयु होना भी जरूरी है। 

वाहन दुर्घटनाओं के अन्य कारणों की ओर इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि युवावस्था के जोश में किशोर वय के वाहन चालक भीड़ - भाड़ भरी सड़कों पर स्टंटबाजी करते दिखाई देते हैं ताकि लोगों को प्रभावित कर सकें।  इसके अलावा गर्दन में मोबाइल फंसा कर बात करते करते कई - कई किमी स्कूटर / बाइक चलाते हुए लोग देखे जा सकते हैं।   बातचीत  में ध्यान होने के कारण दुर्घटना हो जाना आम बात है।

विद्यार्थियों को जहां एक ओर यातायात सुरक्षा के प्रति सजग किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ठोस कचरा प्रबन्धन के अभियान को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।   इसके लिये बच्चों को प्रेरित किया जा रहा है कि वह बायो डिग्रेडेबल और रिसाइक्लेबल कूड़े को अपने अपने घर में अलग - अलग ही रखे रखने के लिये अपने माता-पिता को प्रेरित करें।  

इन कार्यशालाओं में संदेश को और प्रभावी बनाने के लिये शॉर्ट फिल्में व डॉक्यूमेंटरी का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। 

इस अभियान में आरोन एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी के सदस्य खेम चन्द सैनी, योगेश शर्मा, हैरी,  पूजा गिल्होत्रा, ओश्विन टेरेंस, अधिराज गुलाटी तथा द सहारनपुर डॉट कॉम के नीना धींगड़ा,  बी.डी. शर्मा, संदीप शर्मा आदि का  विशेष सहयोग मिल रहा है।
  

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