शुक्रवार, अक्तूबर 12

बालिकाओं के प्रति होने वाले अपराध - ’सेवा’ द्वारा गोष्ठी का आयोजन

क्या विचित्र विडम्बना है!   जिस समाज में ’यत्र नार्यन्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता !’  का आदर्श अनादि काल से चला आ रहा है,  जिस समाज में नवरात्रों में घर - घर में बालिकाओं की पूजा की जाती है, उनके चरण स्पर्श कर के उनको भेंट पूजा दी जाती है, उस समाज में आज  प्रधानमंत्री को ’बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ’  का नारा देना पड़ रहा है!  महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिये कठोरतम कानूनों की मांग करनी पड़ रही है!  दुधमुही बच्चियों के साथ और 70-80 वर्ष की वृद्धाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं समाज में घर कर रही किस विकृति की ओर संकेत कर रही हैं?   हम आखिर कहां गलती कर बैठे हैं?   क्या हमारी शिक्षा दोषपूर्ण है?  या हमारे परिवारों में बच्चों को सही संस्कार नहीं मिल पा रहे हैं?   या मनोरंजन उद्योग व मीडिया में बैठे कुछ लोग धन की अंतहीन पिपासा में जान बूझ कर हमारे युवाओं की मानसिकता को बिगाड़ते हुए उनको गलत आचरण के लिये प्रेरित कर रहे हैं?



इन्हीं सब मुद्दों को लेकर ’सेवा’ (स्मार्ट एजुकेशन एवं वेल्फेयर एसोसियेशन) और परवेज़ सागर फाउंडेशन ने अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर एक संवाद का आयोजन किया। नगर के रूपचंद पब्लिक इंटर कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने उत्साहपूर्ण भागेदारी की। गोष्ठी का शुभारंभ प्रबंधक नकलीराम उपाधयाय, ’सेवा’ की जनसंपर्क अधिकारी श्रीमती नीना धींगड़ा और एम. तनवीर ने सामूहिक रूप से किया। अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री भगवान सिंह ने ’सेवा’ और परवेज़ सागर फाउंडेशन की इस पहल की सराहना करते हुए छात्राओं का आह्वान किया कि उनको अत्याचारों के खिलाफ़ पूरी मज़बूती से खड़ा होना और विरोध करना सीखना होगा।


वहीं, कार्यक्रम के संयोजक एवं ’सेवा’ के समन्वयक एम. तनवीर (मोनू) ने इस बात पर खेद जताया कि आज के दौर में लड़कियां अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं रह गयी हैं। आये दिन उनके साथ घटनाएं होती हैं जिनके लिए कभी घर का ही कोई सदस्य, या रिश्तेदार या पडोसी जिम्मेदार होता है। शर्म, संकोच या भय के कारण लड़कियां अगर चुप रह जाती हैं तो इन अपराधियों का हौसला और अधिक बढ़ता चला जाता है। यह समाज की विडंबना है कि आधुनिक दौर में इस तरह के अत्याचार बालिकाओं और छोटे बच्चों के साथ हो रहे हैं। उनका स्पष्ट मत था कि जागरुकता की शुरुआत परिवारों से ही करनी होगी। घर में बच्चों को बाल्यकाल से ही लड़कियों का सम्मान करने के संस्कार दिये जाने चाहिये।

बिक्री कर विभाग की सेवा निवृत्त अधिकारी श्रीमती करुणा प्रकाश ने छात्राओं को संबोंधित करते हुए कहा कि महिलाओं को स्वस्थ रहने की जरूरत है. क्योंकि उन पर बहुत सारी जिम्मेदारी होती. जब किशोरावस्था से ही वे अपने स्वास्थ के प्रति सचेत होंगी. तभी भविष्य में वे बीमारियों से अपना बचाव कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि बालिकाओं को पोष्टिक आहार के साथ-साथ साफ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए।

’सेवा’ की जन संपर्क अधिकारी नीना धींगरा ने सेवा व पी.एस.एफ. संस्थाओं के क्रियाकलापों का परिचय देते हुए बताया कि हम लगातार 8 सालों से महिलाओं और बच्चों के मुद्दों और शिक्षा को लेकर सक्रिय हैं। भारत में सेवा और पीएसएफ एशियन गर्ल कैम्पेन के पार्टनर भी हैं। दोनों संस्थाएं मिलकर गरीब और श्रमिक तबके के बच्चों के लिए बिना किसी सरकारी आर्थिक सहायता के निशुल्क शिक्षा केंद्र का संचालन भी कर रही हैं।

इस अवसर पर जहां एक ओर विद्यालय की शिक्षिका रेशू त्यागी ने सेवा और पी.एस.एफ. की सराहना करते हुए उनके कार्यों को दूसरी संस्थाओं के लिए प्रेरणास्पद बताया, वहीं दूसरी ओर योग गुरु धनप्रकाश शर्मा ने बालिकाओं के लिये व्यावसायिक व तकनीकी शिक्षा की जरूरत पर बल दिया ताकि वह योग्यता और शिक्षा के बल पर आत्मनिर्भर बन सकें।

शिक्षिक विक्रम चौहान ने छात्राओं से कहा कि वे अपने अंदर का आत्मविश्वास खोने न दें. निर्भीक होकर समाज में अपना स्थान बनाएं. शिक्षा और बेहतर स्वास्थ के सहारे ही लड़कियां अपना भविष्य उज्जवल बना सकती है।

इस अवसर पर कालेज की तरफ से मीनाक्षी, राखी, शाईस्ता, सुषमा, मोहिनी के अतिरिक्त नंदिनी, राखी, विद्या, अनुष्का, प्रीति, शैली, पूजा आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही|  कार्यक्रम का संचालन नीना धींगड़ा ने किया।

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