रविवार, दिसंबर 9

रीति आश्रम के बच्चों ने जाना कि जन्मदिन क्या होता है!


सहारनपुर -  आज का दिन रीति आश्रम, जैन कालिज रोड, सहारनपुर के 38-40 बच्चों के लिये अथाह खुशियां लेकर आया।   आरोन एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी ने आज इन बच्चों का सामूहिक जन्म दिन मनाने का जो निश्चय कर लिया था।   जन्मदिन का अर्थ ही है - खेल - कूद, नाचना - गाना, केक और बढ़िया बढ़िया खाना खाना !   और हां,  जन्मदिन पर उपहार भी तो मिलते हैं ! 

तो बस, आज सुबह छः बजे ही AEWS  टीम के कई सदस्य रीति आश्रम के प्रांगण में टैंट और कुर्सियां लगवाने के लिये पहुंच चुके थे।   आयोजन बड़ा था सो उसकी तैयारियां भी कई दिन पहले से चल रही थीं।  बच्चों की इच्छा थी कि वह एक समूह नृत्य प्रस्तुति भी दें।   उसके लिये AEWS की सदस्य और प्रख्यात कोरियोग्राफर अपर्णा नेगी ने कई बार में और कई - कई घंटों तक रीति आश्रम में जाकर बच्चों को रिहर्सल कराई।   दिशा शुक्ला, राहुल गुनदेव, जौनी वर्मा, अधिराज गुलाटी और खेमचन्द सैनी  संस्था की अध्यक्ष रश्मि टेरेंस के निर्देशन में अन्य सभी तैयारियों में जुटे रहे।   बच्चों के लिये केक, खाने और गिफ्ट का भी तो इंतज़ाम करना था।

आज सुबह 9 बजे तक सब तैयारियां पूर्ण हो चुकी थीं।  पूरी टीम लाल जर्सी और काली जींस पहने अपने अपने काम को अंजाम देने के लिये सन्नद्ध थी।  पर जिन बच्चों का जन्मदिन था, वही हैंड पंप के नीचे नहाने - धोने में मशगूल थे।  मेहमान भी आने शुरु हो गये थे। 
 बच्चों को कहा गया कि पन्द्रह मिनट के भीतर सज - संवर कर पंडाल में आ जायें।  पर AEWS टीम तब तक क्या करे?   जब कुछ और काम न दिखाई दे रहा हो तो डांस से अच्छा और क्या काम हो सकता है?   सो, दिशा, अपर्णा, रश्मि, गीता सिंह, ज्योति, गगनदीप आदि कमर कस कर डांस फ्लोर पर  आ गये और जन्मदिन का माहौल बनने लगा।

और लीजिये,  नीना धींगड़ा और तनवीर की कार ने परिसर में प्रवेश किया  जिसमें बच्चों के लिये  दो विशाल केक भी आ रहे थे।   और ये आ गये हमारे विशिष्ट अतिथि - योगेश दहिया, सईमा मसूद, संदीप शर्मा, हैरी, पूनम बाली, संगीता शर्मा, स्नेही शर्मा आदि !   तभी सामने से पंक्तिबद्ध होकर यूनिफार्म पहने हुए रीति आश्रम के बच्चों ने पंडाल में प्रवेश किया और फिर सही अर्थों में धूम धड़ाका शुरु हुआ। 



फिर समय आया केक काटे जाने का।   रीति आश्रम के सबसे छोटे 12-13 बच्चे केक काटने के लिये बुलाये गये जिन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच में केक काटी।   अपर्णा नेगी के निर्देशन में बच्चों ने ग्रुप डांस की प्रस्तुति दे कर अपना और अतिथियों का मनोरंजन किया।   स्नेही शर्मा ने अपनी सुमधुर आवाज़ में ’दिल है छोटा सा, छोटी सी आशा"  गीत सुना कर सभी श्रोताओं का मन मोह लिया।

इस अवसर पर बोलते हुए श्री योगेश दहिया ने कहा कि AEWS की समाज के लिये अत्यन्त सार्थक गतिविधियों से जुड़ना उनके लिये भी आह्लादकारी और मन को हार्दिक सुकून देता है।   समाज के वंचित, उपेक्षित वर्ग के बच्चों पर इस प्रकार प्यार लुटाना, उनको समय देना, उनके साथ उनका जन्मदिन व अन्य त्योहार मनाना निश्चय ही उनको बेहतर इंसान बनायेगा क्योंकि बचपन में परिवार के प्यार से वंचित बच्चों का अक्सर गलत दिशा में मुड़ जाने का खतरा रहता है।   पर ये बच्चे AEWS टीम से प्यार और शिक्षा पाकर समाज के योग्य नागरिक बनेंगे, यह आशा सहज ही की जा सकती है।





अन्त में संस्था के सचिव सुशान्त सिंहल ने सभी अतिथियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।   इस आयोजन की सफलता में AEWS टीम के सभी सदस्यों - विशेषकर रश्मि टेरेंस, ओश्विन टेरेंस,  दिशा शुक्ला, नीना धींगड़ा, खेम चन्द सैनी, गगनदीप, अधिराज गुलाटी, राहुल गुनदेव, ज्योति, अपर्णा, शगुन खन्ना, जौनी वर्मा आदि का विशेष योगदान रहा। 
  


शनिवार, दिसंबर 8

मुन्नालाल गर्ल्स कालेज की छात्राओं ने गोद लिये पेड़-पौधे !




सहारनपुर - 8 दिसंबर 2018 -   किसी व्यक्ति या वस्तु से आपका नाता जुड़ जाये तो उससे स्नेह भाव विकसित हो, यह भी स्वाभाविक ही है। मुन्नालाल गर्ल्स डिग्री कॉलेज की छात्राओं के साथ आज यही हुआ। अपनी आचार्या डा. पंकज छाबड़ा से प्रेरणा पाकर विभिन्न छात्राओं ने महाविद्यालय परिसर में लगे हुए अनेक पेड़-पौधे गोद ले लिये और उनकी देख-भाल का संकल्प लिया।
 

इतना ही नहीं, उन्होंने ड्राइंग शीट पर अपने अपने गोद लिये हुए पेड़ – पौधे के चित्र भी बनाए। इसका उद्देश्य भी यही था कि वह कुछ देर गोद लिये हुए अपने पेड़ के सामने बैठें, उसे निहारें, उससे जुड़ाव अनुभव करें और उसका चित्रांकन भी करें।

इसके पश्चात् गृहविज्ञान विभाग की एसोसियेट प्रोफेसर और एन.सी.सी. की इंचार्ज डा. पंकज छाबड़ा द्वारा एक क्विज़ का आयोजन भी किया गया। इस प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में छात्राओं से वनस्पति जगत और प्राणिजगत के अन्तर्संबंधों पर आधारित कुछ प्रश्न पूछे गये और सही उत्तर देने वाली छात्रा को पुरस्कृत भी किया।

इसके पश्चात् विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे प्रख्यात्‌ जुडो प्रशिक्षक दीपक गुप्ता ने छात्राओं को जूडो सीखने के लिये प्रेरित करते हुए बताया कि जूडो आत्मरक्षा के लिये आवश्यक मानसिक बल प्रदान करने वाला खेल है जो आजकल की परिस्थितियों में सभी युवतियों को सिखाना आवश्यक अनुभव होने लगा है। सड़क छाप रोमियो से दबने, घबराने, रोने – धोने, विद्यालय आना जाना छोड़ देने के बजाय आप सब में इतना आत्मविश्वास आ जाना चाहिये कि आप वहीं सड़क पर शोहदों को ललकार सकें, उनको ऐसा सबक सिखा सकें कि वह जीवन भर किसी युवती को छेड़ने का स्वप्न भी देखना छोड़ दें।

छात्राओं ने दीपक गुप्ता से अनेक प्रश्न किये और कहा कि अपने से शारीरिक रूप से कहीं अधिक बलशाली व्यक्ति से वह कैसे मुकाबला कर पायेंगी। इस पर जूडो प्रशिक्षक ने कुछ छात्राओं को आगे आने के लिये कहा और उनको जूडो के कुछ सामान्य अभ्यास भी कराये ताकि उनको अहसास हो सके कि शारीरिक बल की कमी इस खेल में आड़े नहीं आती है। बल्कि अपने विपक्षी की शक्ति और उसके वज़न को उसके ही विरुद्ध उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ये तकनीक और स्फूर्ति का खेल है जो आप सब को मानसिक व शारीरिक रूप से सशक्त बनायेगा।

डा. पंकज छाबड़ा ने आये हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर द सहारनपुर डॉट कॉम की सचिव नीना धींगड़ा, अध्यक्ष सुशान्त सिंहल और अनेकानेक शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहीं।

शुक्रवार, दिसंबर 7

विश्व दिव्यांग दिवस पर नेत्रहीन विद्यालय द्वारा स्पोर्ट्स मीट का आयोजन




सहारनपुर : विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर स्थानीय दृष्टिहीन बालक विद्यालय, तोता चौक, सहारनपुर में स्पोर्ट्स मीट का आयोजन किया गया जिसमें दृष्टिबाधित बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं, जैसे म्यूज़िकल चेयर, रस्साकशी, जुडो, क्रिकेट आदि में सोत्साह भाग लेकर और शानदार प्रदर्शन करके अतिथियों को भाव विभोर कर दिया। 




इस अवसर पर बोलते हुए संस्था के अध्यक्ष विक्रम चावला एडवोकेट ने कहा कि हमारा उद्देश्य यही है कि दृष्टिहीनता के बावजूद ये बच्चे समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर अपनी विशिष्ट क्षमताओं के बल पर अपना स्थान हासिल करें। इस पुनीत कार्य में हमें सहारनपुर की जनता और गणमान्य जनों का जो अप्रतिम सहयोग मिल रहा है, वह हमारी सफलता का सोपान अवश्य बनेगा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मनोज शुक्ला मैनेजर आई.टी.सी., श्रीमती संतोष जैन, अध्यक्ष विक्रम चावला व एस.डी.एम. महोदय ने संयुक्त रुप से दीप – प्रज्ज्वलित करके किया। विनीता गोयल, जय श्री, कुमकुम, श्री सेठी ने माल्यार्पण करके अतिथियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर नीना धींगड़ा, अनुपम मलिक आदि उपस्थित रहे।

विश्व दिव्यांग दिवस पर ग्रेस फाउंडेशन द्वारा कार्यक्रम

मेरी डेल एकेडमी, पंजाबी बाग की छात्राओं द्वारा नृत्य प्रस्तुति  
सहारनपुर - पंत विहार, सहारनपुर बाइपास रोड, स्थित ग्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा चलाये जा रहे ग्रेस केयर सेंटर, पंत विहार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सहारनपुर के सांसद राघव लखनपाल ने कहा कि भगवान अगर दिव्यांगजनों से उनकी एक शारीरिक क्षमता लेते हैं तो बदले में उन्हें एक अन्य क्षमता बाकी सब से बेहतर प्रदान कर देते हैं। इसीलिये इनको विकलांग (Physically disabled) न कह कर विशिष्ट क्षमता वान (differently abled) कहा जाता है। उन्होंने भारत सरकार और प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के हितार्थ चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का परिचय देते हुए कहा कि दिव्यांग बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों को इन योजनाओं को समझते हुए उनका यथासंभव लाभ प्राप्त करना चाहिये क्योंकि ये योजनाएं उनको ही समर्पित हैं। 
सहारनपुर के सांसद श्री राघव लखनपाल को स्मृति चिह्न देते हुए ग्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट के पदाधिकारी 
 


इस अवसर पर हरबर्टपुर क्रिश्चियन अस्पताल से आये हुए विशिष्ट अतिथि डा. मैथ्यू सेमुअल, अस्थिरोग विशेषज्ञ ने बाइबिल के अनेकानेक उद्धरण देते हुए कहा कि हम सब को अपनी आय का एक निश्चित प्रतिशत समाज के दुर्बल वर्ग की सेवा में अवश्य देना चाहिये। शुरुआत भले ही १ प्रतिशत से ही हो, पर अगर माता-पिता समाज के प्रति अपने दायित्व बोध का परिचय देते हैं और समाज में चल रहे सेवाकार्यों के लिये दान देते हैं तो उनके बच्चों में भी योग्य संस्कार पनपते हैं। 





उल्लेखनीय है कि आनन्द विहार (पन्त विहार) में पिछले चार वर्ष से चल रहे ग्रेस केयर सेंटर के संचालक इन्द्रमणि और उनकी पत्नी श्रीमती ईस्टर सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) से पीड़ित बच्चों के कौशल विकास व पुनर्वास के लिये ये केन्द्र संचालित कर रहे हैं। इन्द्रमणि की अपनी पुत्री ग्रेस भी इसी रोग से पीड़ित होने के कारण उनके माता-पिता ने अपना जीवन ऐसे सभी बच्चों की सेवा और उनकी देखभाल, पुनर्वास और कौशल विकास और काउंसिलिंग को समर्पित कर दिया है। इस केन्द्र पर अनेकानेक विशेषज्ञ चिकित्सक, फिज़ियोथिरेपिस्ट व काउंसलर आकर अपनी सेवाएं निस्वार्थ भाव से दे रहे हैं। इस अवसर पर सहारनपुर के महापौर संजीव वालिया, द सहारनपुर डॉट कॉम के अध्यक्ष सुशान्त सिंहल ने, एरोन एजुकेशन वेल्फेयर सोसायटी की अध्यक्ष रश्मि टेरेंस ने संस्था को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। रश्मि टेरेंस द्वारा संचालित मेरी डेल एकेडमी के बच्चों द्वारा एक समूह नृत्य की प्रस्तुति भी दी गयी।

मंगलवार, दिसंबर 4

दूसरा अध्याय नाटक का मंचन - नये समर्थ कलाकारों का आगाज़ !

पिछले तीन दशकों से सहारनपुर में रंगकर्म की मशाल अनवरत जलाये चल रहे ’अदाकार’ ग्रुप की नवीनतम नाट्य प्रस्तुति ’दूसरा अध्याय’ ने रंगमंच को पवन शर्मा के रूप में एक नये निर्देशक और आरती शर्मा के रूप में एक उदीयमान अभिनेत्री से परिचय कराया है।   अजय शुक्ला कृत ’दूसरा अध्याय’ नाटक 1993 में साहित्य कला परिषद्‌ द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया था। इस नाटक में केवल दो ही पात्र हैं, लगभग  पूरा नाटक  एक रेस्टोरेंट में बातचीत के रूप में है।  स्वाभाविक ही है कि ये नाटक नाटकीय दृश्यत्व के बजाय कथात्मक अधिक है, अतः इसको रंगमंच पर लेकर आना स्वयं में चुनौतीपूर्ण कार्य है।  सहज और सरल भाषा में जीवन्त संवाद , स्त्री - पुरुष के सम्बन्धों में उलझनें और जटिलताएं और समाज में स्थापित मूल्यों पर सवाल खड़े करना ही इस नाटक की प्रमुख विशेषता है।









दि. 18 नवम्बर 2018 को आई.आई.टी. रुड़की के सहारनपुर स्थित आई.पी.टी. सभागार में मंचित इस नाटक में मुख्य भूमिकाओं में अशोक वर्मा और आरती शर्मा हैं जिन्होंने अभय और नीरजा की भूमिकाओं का भली प्रकार
निर्वहन किया है।  अशोक वर्मा ने पिछले कई दशकों में सहारनपुर के रंगमंच पर अपनी पहचान बनाने के बाद मुम्बई की फिल्म व टी.वी. इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई है। विधि परास्नातक आरती शर्मा एक सफल मॉडल के रूप में जानी जाती हैं किन्तु नाटक में अभिनय का संभवतः उनके लिये यह पहला ही अवसर रहा है और इस सुअवसर का उन्होंने बखूबी उपयोग करते हुए नाटक की मुख्य पात्र नीरजा को जीवन्त किया है।

नाटक की विषय वस्तु सिर्फ इतनी है कि एक ट्रेनिंग के दौरान अविवाहित अभय और विवाहित नीरजा की मुलाकात होती है और दोनों एक दूसरे की ओर खिंचते हैं।  अभय चाहता है कि नीरजा अपने पति और दो बच्चों को  छोड़ कर उसके साथ विवाह बन्धन में बंध जाये।  नीरजा सही और गलत, प्रेम और कर्तव्य के झंझावात में उलझी रहती है। उसको अभय अच्छा लगता है, दोनों की भेंट होती रहती हैं। अभय हर मुलाकात में नीरजा से कहता है कि वह अपने पति व बच्चों से किनारा करते हुए सदा सदा के लिये उसकी हो जाये।  दूसरी ओर नीरजा अपने परिवार को तिलांजलि देने और इस नये रिश्ते से जुड़ने का साहस नहीं बटोर पाती और जब भी अभय से मिलती है, दोनों के बीच इसी  बात पर तकरार आरंभ हो जाती है।  अभय की कुंठा उसे नीरजा पर आक्रोश व्यक्त करने के लिये भड़काती रहती है।  दूसरी ओर,  नीरजा अभय को मनाती रहती है,  उससे और समय की मांग करती रहती है पर अभय का क्षोभ बढ़ते- बढ़ते इस स्थिति में आ जाता है कि अभय अपने जीवन में आगे बढ़ जाता है और नीरजा वापस अपने जीवन में।  अनेक वर्षों के बाद वे पुनः मिलते हैं। अब नीरजा अभय का साथ चाहती है परन्तु अभय के पास अब समय नहीं है और वह पुनः मिलने की बात करके चला जाता है।  पूरी कहानी फ्लैशबैक में अभय के माध्यम से कही गयी है।

दो मुख्य पात्रों के अलावा रेस्टोरेंट के वेटर की भूमिका में पारस रन्धावा ने कहीं - कहीं बोझिल हो रहे नाटक में कुछ मनोरंजक क्षण डाले हैं।  एक दृश्य में अभय और नीरजा रेस्टोरेंट में बैठे हुए कल्पना लोक में खो जाते हैं और स्वयं को एक दूसरे की बाहों में नृत्य करते हुए दिवास्वप्न देखने लगते हैं। इस दृश्य को नायक खन्ना की कोरियोग्राफी के सहयोग से निर्देशक ने बड़ी खूबसूरती से उकेरा है। अभय और नीरजा का यह दिवास्वप्न जीने के लिये दो अन्य कलाकारों - अनुषी अग्रवाल और शुभम का सहयोग लिया गया है। 

नाटक में पार्श्व संगीत विवेक आर्यन ने दिया है।  ध्वनि व प्रकाश व्यवस्था धीरज बत्रा ने संभाली।  वरिष्ठ रंगकर्मी विक्रान्त जैन ने सैट निर्माण में शानदार कल्पनाशीलता का परिचय दिया और निर्देशक ने उसका बखूबी इस्तेमाल भी किया।  खास तौर पर ट्रेन का सेट जिसमें अभय और नीरजा एक दूसरे से मिलते हैं बहुत प्रभावी रीति से मंचित किया गया।  यदि तकनीकी खामियों की बात की जाये तो नाटक की शुरुआत से लगभग आधा घंटे तक अभय और नीरजा को दिये गये कॉलर माइक हर अनावश्यक आवाज़ और शोरगुल भी पकड़ते रहे। एक दृश्य से दूसरे दृश्य पर जाने के दौरान जब मंच पर अंधकार था और मंच सज्जा में परिवर्तन किये जा रहे थे तो माइक को उस दौरान बन्द किया जा सकता था ताकि वह अनावश्यक आवाज़ न पकड़ता रहे।  कहीं - कहीं प्रकाश परिकल्पना में समन्वय की कमी भी अनुभव होती रही जिसके कारण मंच पर मौजूद कलाकार प्रकाश व्यवस्था में परिवर्तन की इंतज़ार करते अनुभव हुए।   पर कुल मिला कर यह एक सफल प्रस्तुति रही और इसका मुख्य लाभ ये रहा कि सहारनपुर रंगमंच को पवन शर्मा के रूप में एक समर्थ निर्देशक और आरती शर्मा के रूप में एक प्रतिभावान अभिनेत्री मिली।

नाटक से पूर्व नगर विधायक श्री संजय गर्ग, जो खुद भी रंगकर्मी रहे हैं और अदाकार ग्रुप के संरक्षक हैं, दर्शकों का स्वागत करने के लिये उपस्थित हुए।  नाटक पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिये पद्मश्री भारतभूषण, श्री शिव कुमार गौड़, डा. संजीव मिगलानी व डा. नैना मिगलानी आदि उपस्थित हुए।  दर्शकों में समाजसेवी श्री योगेश दहिया, आई आई टी सहारनपुर परिसर के प्रमुख डा. वाई.एस. नेगी, विपिन अग्रवाल, फादर फारसिस, शहज़ाद अहमद, डा. संजीव जैन, डा. संदीप गुप्ता, सुरेन्द्र चौहान, के. के. गर्ग, इन्द्रजीत सिंह,  मनजीत सिंह अरोड़ा, नीना धींगड़ा, परवेज़ सागर, राजीव उपाध्याय, प्रशांत राजन, राजीव सिंहल आदि नाटक का आनन्द लेते हुए नज़र आये।

अजय शुक्ला कृत नाटक की विषय वस्तु पर संपादकीय टिप्पणी   

एक व्यक्ति ने मैरिज काउंसलर से अपनी पत्नी के बारे में क्षोभ व्यक्त किया कि वह बहुत शक्की मिजाज़ की है।  मुझे ऑफिस के काम से अक्सर दूसरे शहरों में मीटिंग - सेमिनार आदि के लिये जान-आना पड़ता है।  जब भी मैं किसी मीटिंग या सेमिनार के लिये जाता हूं, वह मुझसे झगड़ा करने लगती है,  मुझे बार-बार फोन करती है, मैं कहां हूं, क्या कर रहा हूं, और कौन - कौन हैं, शाम को मैं कहां था, किसके साथ था, क्या कर रहा था, सवाल पूछ पूछ कर मेरी नाक में दम करके रखती है।  मेरी इस समस्या का क्या हल है?

मैरिज काउंसलर ने पूछा कि आपका विवाह कब हुआ था,  प्रेम विवाह था या माता-पिता की इच्छा से हुआ था तो उस व्यक्ति ने बताया कि पहला विवाह सात वर्ष पूर्व माता-पिता की मर्ज़ी से हुआ था।  ये मेरी दूसरी पत्नी है और हमारा दो वर्ष पूर्व प्रेम विवाह हुआ था।  इस विवाह से पहले पहली पत्नी से मेरा विवाह विच्छेद हो चुका है।
मैरिज काउंसलर ने फिर पूछा कि आपकी मुलाकात आपकी दूसरी पत्नी से कब - कहां और कैसे हुई थी?  इस पर उस व्यक्ति ने बताया कि वह ढाई साल पहले ऑफिस की एक मीटिंग के सिलसिले में बंगलौर गया था, वहीं मीटिंग के दौरान ही इस युवती से परिचय हुआ था।  तीन दिन के टूर में हम एक दूसरे के बहुत करीब आ गये थे और एक दूसरे को बहुत चाहने लगे थे।  बस, मैने अपनी पत्नी को तलाक देकर दूसरी शादी कर ली थी।   मेरे दोनों बच्चे भी मेरी पूर्व पत्नी के पास ही हैं।

मैरिज काउंसलर ने बताया कि आपकी समस्या का मूल यहीं है।  आपकी  दूसरी पत्नी को लगता है कि जैसे आपने एक मीटिंग में मिल गयी एक युवती की खातिर  पांच वर्ष पुराने विवाह संबंध को समाप्त कर दिया, दोनों बच्चों के प्यार की भी आपने परवाह नहीं की वैसे ही,  आपको  पुनः किसी मीटिंग में एक और लड़की मिल गयी तो आप अपनी दूसरी पत्नी को भी त्यागने में देर नहीं करेंगे।   इस असुरक्षा की भावना ने ही उसे आप पर निरन्तर निगाह रखने और आप पर शक करते रहने के लिये विवश किया हुआ है और आप इस बारे में आसानी से अपनी पत्नी को आश्वस्त कर सकेंगे, ऐसा मुझे नहीं लगता। 
     
अजय शुक्ला कृत नाटक दूसरा अध्याय मानवीय स्वभाव के इस मूल पहलू को पूरी तरह से नज़र अन्दाज़ करते हुए, एक अविवाहित पुरुष और एक विवाहित महिला के बीच के प्रेम का कथानक लेकर चलता है और विवाहित महिला द्वारा अपना घर, अपना पति और अपने बच्चे न त्याग पाने को ’खोखले मूल्य’ घोषित करता है, उन पर सवाल खड़े करता है।
  
नाटककार यह सिद्ध करने का प्रयास करता प्रतीत होता है कि नीरजा ने अपने पति व बच्चों की खातिर अपने ’प्रेम’ को अकेला छोड़ कर भीरुता का परिचय दिया।  ऐसे ’खोखले’ सामाजिक मूल्यों की खातिर वह अपने पति और बच्चों को त्याग नहीं पाई और जीवन भर अपने प्रेम की चाहत में दुःखी रही।

स्त्री या पुरुष का किसी नये व्यक्ति के संपर्क में आना, उसके प्रति सम्मोहन / आकर्षण अनुभव करना दैनन्दिन अनुभव की बात है और इसमें नया कुछ भी नहीं है।  यह क्षणिक सम्मोहन है, आकर्षण है जिसे लोग प्यार समझ बैठते हैं।  यदि कोई आत्मकेन्द्रित व्यक्ति अपने इस नये - नये सम्मोहन में फंस कर अपने परिवार और पुराने रिश्तों को तिलांजलि दे दे और नये संबंध स्थापित कर ले तो बहुत जल्द ही उसका भ्रम टूट जाता है।  नया संबंध कभी भी उतनी गहराई नहीं ले पाता क्योंकि नये संबंध स्थापित करने वाले युगल अविश्वास की भावना से आशंकित रहते हैं।

हम पाठकों से भी उनके विचार इस बारे में जानना चाहेंगे।  कृपया अपने कमेंट के रूप में बतायें कि क्या नीरजा ने जो किया, वह सही था?  क्या उसे अपने पति व बच्चों को पीछे छोड़ कर अपने प्यार को पा लेना चाहिये था?  क्या  अभय वास्तव में नीरजा से प्यार करता था जितना नीरजा अभय से करती थी? 

जो विशेष पसन्द किये गये !