व्यापारिक गतिविधियां

सहारनपुर जिला उत्तर प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित है और उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमाएं इसको स्पर्श करती हैं।   मुंबई - हावड़ा रेल मार्ग,  हावड़ा - जम्मू रेल मार्ग,  दिल्ली - देहरादून रेल मार्ग सहारनपुर से होकर निकलते हैं।  दिल्ली से माना राष्ट्रीय राजमार्ग 58,  दिल्ली से यमुनोत्री राजमार्ग क्र. 57, रुड़की - अंबाला राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 73 भी सहारनपुर से होकर निकलते हैं और सड़क यातायात को सुगम बनाते हैं!
स्वाभाविक रूप से सहारनपुर में व्यापारिक गतिविधियां प्राचीन काल से ही महत्वपूर्ण स्थान रखती रही हैं। सहारनपुर में  केवल व्यापारिक गतिविधियां ही नहीं हैं अपितु  कृषि उपज, दवा निर्माण, होज़ियरी उद्योग, लौह उपकरण, काष्ठकला उद्योग से जुड़ी यहां हज़ारों औद्योगिक इकाई हैं।  बान, रस्सी, चटाई, जूट आधारित उद्योग भी यहां पर भरपूर हैं।   सहारनपुर की मिठाई और नमकीन, बेकरी और कंफेक्शनरी बहुत दूर - दूर तक प्रसिद्ध है।   सहारनपुर का काष्ठकला उद्योग तो विश्व में सहारनपुर को विशेष स्थान दिलाए हुए है और देश को विदेशी मुद्रा अर्जित करके देता है।  सहारनपुर के हज़ारों परिवार इस कुटीर / लघु उद्योग पर निर्भर हैं।

सहारनपुर नगर  में थोक व्यापार 

  • कृषि उपज (गुड़ व खांडसारी, खाद्यान्न, जड़ी - बूटियां आदि) -  मोरगंज बाज़ार  
  • लोहे का सामान (कृषि उपकरण, हैंडपंप, विभिन्न औद्योगिक व घरेलू गतिविधियों में उपयोग में आने वाले उपकरण) - रेलवे रोड / लोहानी सराय / लोहा बाज़ार आदि 
  • दवा बाज़ार व सर्जिकल उपकरण - खान मार्किट / किशनपुरा दवा बाज़ार 
  • स्वर्णाभूषण  - सर्राफा बाज़ार / कोर्ट रोड
  • मिठाई व नमकीन - हलवाई हट्टा / घंटाघर  
  • कपड़ा बाज़ार -  पंजाबी मार्किट / नया बाज़ार /  नेहरू बाज़ार / शहीद गंज / रायवाला मार्किट 
  • जूता - चप्पल - नक्खासा बाज़ार , जे.पी. कॉम्प्लेक्स (भगत सिंह मार्ग) 
  • पान - सुपारी - कत्था आदि -  नक्खासा बाज़ार 
  • घड़ियां - नक्खासा बाज़ार, घंटाघर, कोर्ट रोड 
  • चूड़ी,  कंगन व नकली जेवरात  -  गौरी शंकर बाज़ार (निकट सर्राफा बाज़ार) 
  • काष्ठकला हैंडीक्राफ्ट व सजावटी फर्नीचर - पुरानी मंडी / बाज़दरान स्ट्रीट
  • अस्पताल व चिकित्सक - बाजौरिया रोड 
  • होज़ियरी का सामान - हिरन मारान / मटिया महल     

 सहारनपुर नगर में फुटकर व्यापार 

सहारनपुर नगर में उक्त थोक व्यापारी फुटकर व्यापार भी करते हैं ।  फुटकर व्यापार हेतु बड़े - बड़े शोरूम आम तौर पर निम्न स्थानों पर दिखाई देते हैं - 
  • कोर्ट रोड, सहारनपुर  - इलेक्ट्रिक व विद्युत उपकरण, रेडीमेड गार्मेंट्स, रेस्टोरेंट्स, बैंक, ज्यूलरी, क्रॉकरी, दवाएं, मोबाइल आदि  
  • नेहरू मार्किट सहारनपुर - कपड़ा, साड़ियां - सूटिंग्स व शर्टिंग्स,  होज़ियरी, ऊनी कपड़े, रेडीमेड गार्मेंट्स, क्राकरी, दवा आदि ! 
  • काष्ठ कला (हैंडीक्राफ्ट) -  बाज़दरान स्ट्रीट 
  • भगत सिंह मार्ग व घंटाघर - मिठाई, बेकरी व कंफेक्शनरी, मोबाइल, रेस्टोरेंट्स, होटल, सिनेमा हॉल, बैग, जूते-चप्पल
  • देहरादून रोड (निकट घंटाघर) - ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स, फर्नीचर आदि 
  • लिंक रोड - प्लास्टिक का सामान, थर्मोवेयर, कांच,  आधुनिक फर्नीचर,  मोटर साइकिल, स्कूटर, फ्रिज, वाशिंग मशीन, टी वी के शोरूम  (Honda, TVS, Hero, Samsung, LG, Whirlpool, Sony etc.)
  • प्रताप मार्किट - विद्युत उपकरण,   

सहारनपुर में औद्योगिक क्षेत्र और औद्योगिक इकाइयां   

सहारनपुर में विभिन्न प्रकार की औद्योगिक इकाइयां हैं।  चीनी, गुड़, खांडसारी, दवाएं, जड़ी - बूटियां, कागज़ व गत्ता, काष्ठकला, कृषि उपकरण, वैज्ञानिक उपकरण, पेपर मिल मशीनरी, होज़ियरी, सिगरेट आदि सहारनपुर के प्रमुख उत्पाद हैं !
     
काष्ठकला उद्योग - अनेक सदियों से सहारनपुर का काष्ठकला उद्योग विश्व भर में इस शहर को अपना एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाए हुए है।  हज़ारों मुस्लिम परिवार इस उद्योग को अपने घरों, दुकानों, कारखानों से संचालित करते हैं।   अपने मूल रूप में काष्ठकला उद्योग एक कुटीर उद्योग रहा है और घर - घर में लकड़ी का सामान ( खिलौने, कलात्मक उपयोगी वस्तुएं, फर्नीचर आदि) बनता हुआ दिखाई देता है।   सहारनपुर से काष्ठकला उत्पादों का विश्व के अनेकानेक देशों में निर्यात होता है।   आम तौर पर ये इकाइयां सहारनपुर नगर के पुरानी मंडी क्षेत्र व बाज़दारान स्ट्रीट में स्थित हैं।  काफी सारी इकाइयां खाताखेड़ी में भी हैं जो कि चिलकाना रोड से लगा हुआ आवासीय क्षेत्र है।  खाताखेड़ी में कुछ पाकिस्तानी आतंकवादी पकड़े जाने के बाद से इस क्षेत्र को पुलिस संवेदनशील इलाका मानती है।   अधिक पढ़ें >>>>>> 

इंडस्ट्रियल एरिया दिल्ली रोड सहारनपुर -  यहां पर कुछ बड़ी - बड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थित हैं जैसे सूरज ऑटोमोबाइल्स जो तीन पहिया ऑटो ( जिनको टैंपो भी कहा जाता है) के निर्माता हैं।  इस टैंपो के कुछ मॉडल सवारी ढोने के काम आते हैं और कुछ सामान ढोने के लिये हैं।  इसके अलावा यहां पर वुड क्राफ्ट के निर्यातकों की इकाइयां भी हैं।   ये इंडस्ट्रियल एरिया सहारनपुर - दिल्ली मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग - क्रं. 57) पर स्थित है और सहारनपुर के घंटाघर से लगभग 6 किमी दूर है।  

इंडस्ट्रियल एस्टेट दिल्ली रोड  सहारनपुर -  ये भी सहारनपुर दिल्ली राजमार्ग क्र. 57 पर ही स्थित है और घंटाघर से लगभग 3 किमी दूर है।  यहां पर 150 से 200 के लगभग औद्योगिक इकाइयां कार्यरत हैं।

इंडस्ट्रियल एस्टेट, देहरादून रोड सहारनपुर -  सहारनपुर से देहरादून जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 73 पर घंटाघर से लगभग 4 किमी आगे चल कर ये इंडस्ट्रियल एरिया आता है।   यहां पर मुख्यतः भारी उद्योग हैं - जैसे लोहे के सरिये, पाइप आदि का निर्माण, स्टील फैब्रिकेशन, हैंड पंप निर्माण आदि !  वैसे कुछ दवा निर्माता भी यहां पर हैं।    

कामधेनु कांप्लेक्स जनता रोड सहारनपुर  -  देहरादून रोड से बेहट रोड को मिलाने वाली जनता रोड पर कामधेनु इंडस्ट्रियल एस्टेट बनाई गई है जो ट्रांसपोर्ट नगर से बहुत नज़दीक है।   यहां पर लगभग 100 इकाइयां मौजूद हैं जो होज़ियरी, लौह उपकरण, ऑफसेट प्रिंटिंग आदि से संबंधित हैं।
  
हिरन मारान - जुराब, बनियान, अंडरवीयर, इनरवीयर, थर्मल वीयर  व बच्चों के होज़ियरी उत्पाद बनाने वाली अनेकानेक इकाइयां यहां पर मौजूद हैं।   

इसके अलावा सैंकड़ों - हज़ारों छोटी छोटी औद्योगिक इकाइयां सहारनपुर के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में फैली हुई हैं जिनका वर्णन असंभव सा ही है।
सहारनपुर में कुछ बड़ी औद्योगिक इकाइयां भी मौजूद हैं - 

आई.टी.सी. लिमिटेड - सिगरेट निर्माण की एक बहुत बड़ी इकाई सहारनपुर में सरदार पटेल मार्ग, खलासी लाइन में मौजूद है।  मूलतः सिगरेट निर्माण के लिये प्रसिद्ध आई.टी.सी. लिमिटेड आज एक बहुत बड़ा ब्रांड है और खाद्य पदार्थ, सौन्दर्य प्रसाधन, रेडीमेड गार्मेंट्स, आटा, रिफाइंड ऑयल, बिस्कुट, साबुन, शैंपू, कंडीशनर, एंटीसेप्टिक सैवलॉन, माचिस, अगरबत्ती आदि आदि लोकप्रिय उत्पादों की निर्माता है।  

स्टार पेपर मिल - स्टार पेपर मिल की स्थापना बाजोरिया ग्रुप द्वारा 1938 में की गयी थी और उस समय ये 7000 मैट्रिक टन कागज़ का निर्माण करती थी जो बढ़ते - बढ़ते 2007-08 में 72000 मैट्रिक टन हो चुका था।

इंडियन हर्ब्स - इस इकाई की शुरुआत श्री रामलाल अग्रवाल द्वारा दुधारू पशुओं के लिये हिमालयन बतीसा  नामक दवाई के निर्माण से हुई थी जो अब न केवल पशुओं, बल्कि मछलियों व मानवों के लिये भी आयुर्वेदिक दवाओं के लिये प्रसिद्ध है।      

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