रविवार, मई 19

आर पी शुक्ल - हाइकुकार

क्या नहीं हैं विलक्षण प्रतिभा के धनी श्री आर.पी. शुक्ल?  कहानीकार, ग़ज़लकार, मूर्तिकार, पेंटर, कवि, उपन्यासकार, संस्मरण लेखक, ओजस्वी वक्ता और हां,  कर्तव्यनिष्ठ एवं कुशल  प्रशासक !   सहारनपुर मंडल के मंडलायुक्त के रूप में हमारा उनसे परिचय हुआ।  धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलू सामने आते गये और सहारनपुर वासी उनके और वह सहारनपुर के मुरीद होते चले गये!   यहीं रह कर उनकी भेंट प्रख्यात ग़ज़लकार और हाइकुकार  श्री कमलेश भट्ट कमल से भी हुई जो उन दिनों सहारनपुर में सहायक बिक्रीकर आयुक्त थे।  श्री कमलेश भट्ट ’कमल’ ने उनको जापानी कविता शैली ’हाइकु’ से परिचित कराया।  बस, फिर क्या था, आर.पी. शुक्ल कवि और ग़ज़लकार तो पहले से ही थे, अब हाइकु लिखने की भी धुन सवार हो गयी।  उनकी कुछ हाइकु रचनाएं हम आपके लिये यहां ले आये हैं।  बताइये, कैसी लगीं?   

कमल था
जो बना गया मुझे
हाइकुकार !

*****
वह रोकता
तो रुक भी जाता मैं
रोकता तो वो ।
* * *
और कौन है
दुश्मन मेरा, दोस्त
मैं ही खुद हूं।
* * *
लौटेगा जब
खून से लथपथ,
माथा चूमूंगा।
* * *
चाहूं हूं तुझे
गांव की माटी क्योंकि
जानू हूं तुझे ।

* * *

खुदा है तो आ
मेरी मदद कर
वरना बुत है।

* * *

हिरन दौड़ा
मरीचिका के पीछे
तो पानी हंसा ।
* * *
जीवन मेरे
मैं गाता हूं तू भी गा
साथ रहेगा !

* * *

चुम्बक हूं मैं
खींच लाऊंगा तुझे
ऐ मेरे यार !

* * *

शालीन होना
मुश्किल बहुत है
कोशिश कर !

* * *

गीत या गाली
कुछ भी कहो पर
लय में तो हो !

* * *

वो चलता है
बने रास्तों पे किन्तु
मैं बनाता हूं !

* * *
मारना ही था
तो पैदा क्यूं किया था
मज़ाक़ है क्या ?

* * *
घर कहां है
घुस गया बाज़ार
रिश्ते - नातों में ।

* * *
मेरे ही लिये
रात भर जागा है
चांद बेचारा !

* * *
उसकी बातें
समझ नहीं आतीं
सच बोले है !

* * *
रजनीगंधा
बैठ, देख कितनी
मदमस्त है।

* * *
ए.सी. में बैठ
इतना न इतरा
जम जायेगा!

* * *
घर छोटा है
क्या रह लोगे तुम
दिल बड़ा है।

* * *
ठीक नहीं है
संबंधों में दरार
जल्दी भर ले !

- आर.पी. शुक्ल

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